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टाटा जू में संक्रमण से 10 कृष्ण मृग की मौत, ओरमांझी में अलर्ट

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December 8, 2025

टाटा जू में संक्रमण से 10 कृष्ण मृग की मौत, ओरमांझी में अलर्ट

जमशेदपुरः टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में एक से छह दिसंबर के बीच 10 कृष्ण मृग की मौत हो गयी। आखिरी कृष्ण मृग की मौत शनिवार हो हुई। प्रारंभिक जांच में पाश्चुरेला बैक्टीरिया क कारण मौत की बात कही जा रही है। इसे हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया (गलघोंटू) नामक घातक बीमारी भी कहते हैं।पार्क प्रबंधन के अनुसार, जू में कुल 18 ब्लैकबक थे, जिनमें से अब केवल 8 जीवित बचे हैं। मामला सामने आते ही जू प्रशासन ने बाड़ों में एंटी-बैक्टीरियल दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया गया है।जमशेदपुर के टाटा जू में हुई घटना के बाद रांची के ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान को अलर्ट कर दिया गया है।

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पहली मौत 1 दिसंबर को, जांच के लिए सैंपल रांची भेजे गए
टाटा जू के Deputy director नईम अख्तर ने बताया कि ब्लैकबक की पहली मौत 1 दिसंबर को हुई थी। इसके बाद हर दिन एक नया मामला सामने आता गया, जिससे स्थिति गंभीर होती चली गई। लगातार मौतों के बाद सभी शवों का पोस्टमार्टम किया गया और सैंपल को रांची वेटनरी कॉलेज भेजा गया। कॉलेज की पैथोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रज्ञा लकड़ा के अनुसार, शुरुआती जांच में मौत का कारण हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया को बताया गया है। यह बीमारी पाश्चुरेला नामक बैक्टीरिया से फैलती है, जिसे पाश्चुरेलोसिस भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि अंतिम रिपोर्ट सोमवार को जारी होगी, जिसके बाद बीमारी की आधिकारिक पुष्टि संभव होगी।

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संक्रमण इतनी तेजी से फैलता है कि जानवर को बचाना मुश्किल
रांची वेटनरी कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष एमके. गुप्ता ने बैक्टीरिया की गंभीरता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाश्चुरेला बैक्टीरिया बहुत तेजी से पूरे शरीर में फैलता है। यह सीधे फेफड़ों पर हमला करता है।एमके गुप्ता ने कहा कि इस बैक्टीरिया की चपेट में आने के बाद जानवरों को सांस लेने में कठिनाई होती है। तेज बुखार के साथ गर्दन में सूजन जैसी समस्या हो जाती है। डायरिया इसके प्रमुख लक्षण हैं।गुप्ता के अनुसार, यह संक्रमण इतना तीव्र होता है कि कई बार इलाज शुरू होने से पहले ही जानवर की अचानक मौत हो जाती है। यही वजह है कि टाटा जू के ब्लैकबक लगातार दम तोड़ते चले गए।

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सीजेडए को भेजी रिपोर्ट, जू प्रशासन की सख्त निगरानी
जमशेदपुर के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) सबा आलम ने बताया कि जू प्रबंधन के अनुरोध पर जांच के लिए सभी सैंपल रांची भेजे गए हैं। साथ ही इन मौतों की विस्तृत जानकारी केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) को दे दी गई है।जू के डिप्टी डायरेक्टर नईम अख्तर ने दावा किया कि अब स्थिति नियंत्रण में है। जीवित ब्लैकबक को एंटी-बैक्टीरियल दवाएं दी जा रही हैं, बाड़ों को संक्रमण मुक्त करने के लिए फॉगिंग, स्प्रेइंग और सभी जानवरों की 24/7 मॉनिटरिंग की जा रही है।

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