रांचीः कोडिन की 26 लाख की शिशियां झारखंड के शैली ट्रैडर्स के गोदाम में थी और चंद महीनों के अदंर वे बाजार में बिक गई । कहां गई फेन्सिडिल युक्त इतनी बोतलें ? एबॉट कंपनी ने आखिरी इतनी भारी मात्रा में कोडिन झारखंड में सप्लाई क्यों की ?
- शुभम जायसवाल ने रांची में बनाया अड्डा
- शुभम जायसवाल के इशारे पर मिलता था ड्रग लाइसेंस
- धनबाद में एक ही दिन में कई ड्रग लाइसेंस
- अमित सिंह है शुभम जायसवाल का खास
- धनबाद में श्रेयांसी मेडिकल एजेंसी पर एफआईआर
- धनबाद में फेन्सिडिल की लाखों बोतलें सप्लाई
- पलामू में बंद दुकानों से हुई नशीली दवा सप्लाई
- बोकारो में भी मामला दर्ज
- रांची में है शैली ट्रेडर्स का विशाल गोदाम
शुभम जायसवाल ने रांची में बनाया अड्डा
रांची के तुपुदाना के गोदाम से निकल कर कोडिन की बोलतें जिन दुकानों पर पहुंची आखिरी वो खुलने के बाद से ही बंद क्यों रहती हैं। आखिरकार नशीले कफ सिरफ का कारोबारी शैली ट्रेडर्स के तार झारखंड में कितने गहरे हैं । कौन है भोला और उसका शुभम जायसवाल जिस तक अभी तक पहुंचने में नाकाम है यूपी की एसटीएफ ? इन तमाम सवालों के राज झारखंड की बंद पड़ी उन दवा दुकानों में है जिस पर हो चुकी है एफआईआर।
शुभम जायसवाल के इशारे पर मिलता था ड्रग लाइसेंस
जी हां शुभम जायसवाल का सबसे करीबी अमित सिंह टाटा के पकड़े जाने के बाद नशे कफ सिरफ के काले कारोबार के झारखंड कनेक्शन के तार और मजबूती से जुड़ रहे हैं । शुभम जायसवाल के नशे कारोबार का धंधा कितना संगठित तरीके से चलता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड के पलामू और बोकारो और धनबाद में जिन दवा दुकानों के शैली ट्रेडर्स ने कोडिन युक्त फेन्सिडिल भेजी गई वो दवा दुकानें या तो कभी खुलती ही नहीं थी या फिर दुकान से लाखों बोलतों का हिसाब-किताब पता नहीं चल सका ।
धनबाद में एक ही दिन में कई ड्रग लाइसेंस
सबसे चौंकाने वाला मामला धनबाद का है । उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने अमित कुमार सिंह जिसे अमित सिंह टाटा के नाम से भी जाना जाता है को शुभम जायसवाल के नशीले कफ सिरफ की जांच के दौरान गिरफ्तार किया है। अमित सिंह टाटा धनबाद में देव कृपा मेडिकल एजेंसी का मालिक है। देव कृपा मेडिकल एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है । अमित सिहं की देव कृपा मेडिकल एजेंसी ने शैली ट्रेडर्स से न्यू फेन्सिडिल कफ सिरफ की 69 हजार बोतलें खरीदीं । इतनी भारी मात्रा में फेन्सिडील का क्या हुआ जब इसका जवाब मांगा गया तो दवा दुकान बंद पाई गई ।
अमित सिंह है शुभम जायसवाल का खास
अब अमित सिंह टाटा को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है और धनबाद में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। फेन्सिडील और शैली ट्रेडर्स और वाराणसी के ‘ड्रग कार्टल’ के कनेक्शन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों वाराणसी के रहने वाले हैं । अमित सिंह टाटा का पता भी उसी इलाके का है जहां का शुभम जायसवाल है ।
धनबाद में श्रेयांसी मेडिकल एजेंसी पर एफआईआर
फेन्सिडील -शुभम जायसवाल और वाराणसी के कनेक्शन का एक और सबूत है श्रेयांसी मेडिकल एजेंसी । श्रेयांसी मेडिकल एजेंसी जिसका मालिक आलोक प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश का रहने वाला है ने भी शैली ट्रेडर्स से करीब 70 हजार न्यू फेन्सिडिल कफ सिरफ खरीदी । ड्रग इंस्पेक्टर ने जब भी धनबाद के नवाडीह स्थित दवा दुकान पर छापेमारी की तो दुकान बंद मिली। कोडिन युक्त 70 हजार बोतलें कहां खपा दी गई इसकी कोई हिसाब किताब नहीं मिला। इस पर भी एफआईआर दर्ज की गई है ।
धनबाद में फेन्सिडिल की लाखों बोतलें सप्लाई
धनबाद की एक और दवा एजेंसी योहान फॉर्मा ने भी शैली ट्रेडर्स से न्यू फेन्सिडिल कफ सिरफ की 69 हजार बोतलें खरीदी। योहान फॉर्मा से भी जब इतनी भारी मात्रा में नशीली दवाओं का लेखा-जोखा मांगा गया तो हर बाद दुकान बंद रही । धनबाद में योहोन फॉर्मा के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है ।
गौर करने वाली बात ये है कि अमित सिंह टाटा की देवकृपा मेडिकल एजेंसी, आलोक प्रताप सिंह की श्रेयांसी मेडिकल एजेंसी और योहान फॉर्मा तीनों को ड्रग लाइसेंस एक साथ मिला और तीनों के लाइसेंस की वैधता 30 जनवरी 2029 तक की है और तीनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं ।
पलामू में बंद दुकानों से हुई नशीली दवा सप्लाई
पलामू के औषधि निरीक्षण कैलाश मुंडा ने पलामू में शैली ट्रेडर्स के ताल्लुक रखने वाले ऐसी ही दवा दुकान के मालिक के खिलाफ एफआईआर की है । डालटेनगंज के रांची रोड में मौजूद समृद्धि फॉर्मास्यूटिकल्स के मालिक धर्मेंद्र अग्रवाल के खिलाफ NDPS की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई है । एफआईआर के मुताबिक धर्मेंद्र अग्रवाल जो कि वाराणसी के भेलपुर के स्थाई निवासी है ने मेदिनीनगर में सत्यप्रिय की दुकान 11 महीनों के लिए किराए में ली लेकिन दुकान कभी नहीं खुली। धर्मेंद्र अग्रवाल का समृद्धि फॉर्मास्यूटिकल्स ने शैली ट्रेडर्स से 25 अगस्त को फेन्सिडिल की 26 हजार बोतलें खरीदीं । इससे पहले वर्ष 2025 के अक्टूबर में भी 3 हजार बोलतें फेन्सिडिल की खरीदी गई। इतनी भारी मात्रा में नशीली कफ सिरफ उस दुकान में थी जो कभी खुली ही नहीं । जाहिर है इसे नशे के लिए बेचा जा रहा था।
बोकारो में भी मामला दर्ज
इसी तरह का मामला बोकारो में दर्ज हुआ है जहां आर्यन सिंह के सन फॉर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है । सन फॉर्मा ने भी शैली ट्रेडर्स से 45 लाख रुपए से अधिक की फेन्सिडिल खरीदी । औषधि निरीक्षक पुतली बिलुंग द्वारा दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि सन फॉर्मा ने फेन्सिडिल कफ सिरप के लिए सिर्फ साढ़े पांच लाख रुपए का इन्वॉयस दिया जबकि शैली ट्रेडर्स से 45 लाख से अधिक की नशीली कप सिरफ ली गई।
रांची में है शैली ट्रेडर्स का विशाल गोदाम
उत्तर प्रदेश के वाराणसी से आकर झारखंड में शुभम जायसवाल ने नशीली कफ सिरफ का जो विशाल काला बाजार फैलाया उसकी शुरुआत साल 2023 में हुई जब शैली ट्रेडर्स को पहली बार रांची के टुपुदाना में ड्रग लाइसेंस मिला । इसके बाद भोला प्रसाद के बेटे शुभम जायसवाल ने वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश के अपने जान–पहचान वालों को धड़ाधड़ लाइसेंस दिलवाना शुरु कर दिया। बताया तो जाता है कि शैली ट्रेडर्स ने एबॉट जैसी बड़ी कंपनियों के साथ सांठ–गांठ कर कोडिन युक्त न्यू फेन्सिडिल कफ सिरफ की करोड़ों बोतलें बांग्लादेश, नेपाल में बेचवा दी ।




