प्रकृति पर्व सरहुल की धूम, घड़ा का पानी देखकर इस साल मॉनसून में अच्छी बारिश की भविष्यवाणी

पहान ने घड़ा के पानी को देखकर अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की
रांची। जनजातीय समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार और प्रकृति पर्व सरहुल के मौके पर दो वर्ष बार एक बार फिर सड़क पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। सरहुल के मौके पर आदिवासी धर्मगुरु पहान की ओर से घड़ा का पानी देखकर अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की गयी है।
सरहुल के मौके पर धर्मगुरु पहान की ओर से विभिन्न अखरा में विधि-विधान पूर्वक अपने आदिदेव सिंगबोंगा की पूजा अनुष्ठान कराया जा रहा है। दो दिन के इस अनुष्ठान में कई तरह की रस्म निभाकर विधि-विधान से पूजा के दौरान सुख-समृद्धि के लिए मुर्गा की बलि देने की परंपरा निभायी गयी। ग्राम देवता के लिए रंगवा मुर्गा अर्पित किया जाता है। पहान देवता से बुरी आत्मा को गांव से दूर भागने की कामना करते है। इस अनुष्ठान में एक दिन पहले प्रकृति पूजक उपवास रहकर केकड़ा और मछली पकड़ने जाते हैं, परंपरा है कि घर के नये दामाद या बेटा केकड़ा पकड़ने खेत जाते हैं, केकड़े को साल पेड़ के पत्तों से लपेटकर चूल्हे के सामने टांगा जाता है। आषाढ़ माह में बीज बोने के समय इसी केकड़ा का चूर्ण बनाकर बीज के साथ खेत में बोया जाता है। इस परंपरा को लेकर ऐसी मान्यता है कि केकड़ा के पैर की तरह फसल की वृद्धि होगी। आदिवासी समाज में ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से घर में खुशहाली आती है।

घड़ा का पानी देकर अच्छी बारिश की भविष्यवाणी

सरहुल को लेकर इस पूजा के बाद शाम में विभिन्न मौजा के पाहनों द्वारा ढोल-मांदर बजाते हुए कुएं या पास के तालाब से दो घड़ा पानी लाकर जल रखाई की रस्म निभायी जाती है। पानी भरे दोनों घड़ा को सरनास्थल के उत्तर और दक्षिण दिशा में रखा जाता है। पानी की गहराई को साल (सखुआ) के तनी से नापा जाता हैं, जिसके बाद दूसरे दिन घड़े में पानी को उसी तनी से नापा जाता है। पानी के कम होने या ना होने पर इस साल वर्षा का अनुमान किया जाता है । इसी अनुमान को लेकर आज रांची के केंद्रीय पूजा स्थल सरनाटोली हतमा के मुख्य पुजारी जगलाल पहान द्वारा इस साल मॉनसून में अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की गयी।

लोकनृत्य और परिधान का महत्व
सरहुल के मौके पर लोक नृत्य और परिधान का काफी महत्व है। आदिवासी समाज में मान्यता है कि नृत्य ही संस्कृति है। सरहुल के मौके पर राज्यभर में जगह-जगह नृत्य उत्सव होता है। महिलाएं सफेद में लाल पाड़ की साड़ी पहनतीं हैं। बताया जाता है कि सफेद पवित्रता और शालीनता का प्रतीक है और लाल संघर्ष का। सफेद सर्वाेच्च देवता सिंगबोंगा और लाल बुरुबोंगा का प्रतीक है। इसी कारण सरना झंडा भी लाल और सफेद ही होता हैं।

सरहुल शोभायात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
सरहुल शोभायात्रा को लेकर राजधानी रांची मं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। दो हजार से ज्यादा पुलिस के जवान सुरक्षा में तैनात नजर आये, इसके अलावा रांची के सीनियर एसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी समेत शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक की मॉनिटरिंग करते रहे।

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