गोड्डा का अडाणी पावर प्लांट भारत में भी बेचेगा बिजली, भारतीय ग्रिड जोड़ने की केंद्र सरकार से मंजूरी

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October 17, 2025

डेस्क:  सरकार ने अडाणी पावर लिमिटेड (APL) को गोड्डा अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट को भारतीय विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइन बिछाने की अनुमति दे दी है। यह कनेक्शन कहलgaon A–मैथन B 400 केवी लाइन के लाइन-इन लाइन-आउट (LILO) सिस्टम के जरिए किया जाएगा। फिलहाल यह प्लांट केवल बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति करता है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने ये खबर प्रकाशित की है ।

मंत्रालय की नवीनतम मंजूरी 25 वर्षों के लिए दी गई है। आदेश के अनुसार, लाइन निर्माण से पहले कंपनी को स्थानीय निकायों, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग आदि से अनुमति लेनी होगी और कार्य पूरा होने के बाद केंद्रीय विद्युत निरीक्षक से प्रमाणन प्राप्त करना होगा। इसके अलावा, कंपनी को नागरिक उड्डयन और रक्षा मंत्रालय से स्वीकृति लेने के बाद सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के समक्ष क्लीयरेंस दाखिल करना होगा।

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गौरतलब है कि हाल ही में गौतम अडाणी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भी मुलाकात हो चुकी है । माना जा रहा है कि इस मुलाकात के पीछे अडाणी पावर प्लांट की बिजली और उसके लिए जरुरी सरकारी मंजूरी वजह हो सकती है ।  गौतम अडानी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की मुलाकात, झारखंड में निवेश को लेकर हुई चर्चा

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अखबार ने लिखा है कि प्रस्तावित ट्रांसमिशन लाइन झारखंड के गोड्डा जिले के दो प्रखंडों—गोड्डा और पोरेयाहाट—के 56 गांवों से होकर गुजरेगी। इसके लिए केंद्र ने अडाणी पावर को वही अधिकार दिए हैं जो भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के तहत टेलीग्राफ प्राधिकरण को तार और खंभे लगाने के लिए प्राप्त हैं। इस अधिनियम के तहत प्राधिकरण किसी भी अचल संपत्ति पर, उसके ऊपर या नीचे, समय-समय पर तार बिछा सकता है और खंभे स्थापित कर सकता है।

केंद्र के बिजली मंत्रालय ने 29 सितंबर को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 164 के तहत आदेश जारी कर अडाणी पावर को यह अधिकार प्रदान किया।मंत्रालय का यह आदेश कई अभूतपूर्व संशोधनों के बाद आया है, जिनके जरिए अडाणी पावर के गोड्डा प्लांट को ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी देने का रास्ता खोला गया। इसमें बिजली आयात-निर्यात दिशा-निर्देशों में संशोधन, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) द्वारा क्रॉस-बॉर्डर पावर फ्लो के लिए प्रक्रियाओं में बदलाव, और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) द्वारा इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) एवं सीमा-पार विद्युत व्यापार से जुड़ी विनियमों में बदलाव शामिल हैं।

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अडाणी पावर का गोड्डा प्लांट, जिसे केंद्र सरकार ने मार्च 2019 में विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) घोषित किया था, अब तक केवल बांग्लादेश को बिजली सप्लाई करता रहा है। हालांकि, अगस्त 2024 में ढाका में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां की सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के तहत इस प्लांट को भारतीय उच्च वोल्टेज नेटवर्क (ISTS) से जोड़ने की अनुमति दी थी। यह नेटवर्क देश के राज्यों के बीच बिजली के प्रवाह को सक्षम बनाता है और ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करता है।

इस निर्णय के बाद अब अडाणी पावर को भारतीय बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को भी बिजली बेचने का अवसर मिलेगा।

दरअसल, अडाणी पावर (पूर्व में अडाणी पावर झारखंड लिमिटेड) ने 6 अगस्त 2024 को बिजली मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा था कि “भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए यदि बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) किसी कारणवश बिजली नहीं खरीदता, तो गोड्डा प्लांट से भारत में आपूर्ति की अनुमति दी जाए।”

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इस पर मंत्रालय में 10 अगस्त 2024 को बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता पावर सेक्रेटरी ने की। इसमें तय किया गया कि सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (CTUIL) को संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार अडाणी पावर को अस्थायी ISTS कनेक्टिविटी देने की अनुमति दी जाए। साथ ही CERC को आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया गया ताकि गोड्डा प्लांट से उपलब्ध ग्रिड क्षमता के अनुसार बिजली आपूर्ति की जा सके।

आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि प्रस्तावित लाइन का कोई हिस्सा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण क्षेत्र से गुजरता है, तो कंपनी को सर्वोच्च न्यायालय के याचिका संख्या 838/2019 में दिए गए आदेशों और गठित तकनीकी समिति के निर्देशों का पालन करना होगा।

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