मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं…झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गयाः हेमंत सोरेन

hemant and shibu soren

झारखंड के आंदोलन कारी दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हो गया है। सबसे कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन 81 साल के थे। करीब एक महीने से दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन पर देशभर के नेताओं ने दुख जताया है। उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं….

उन्होंने एक्स पर लिखा है….
मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुज़र रहा हूँ।
मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया।

मैं उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं कहता था  वे मेरे पथप्रदर्शक थे,
मेरे विचारों की जड़ें थे, और उस जंगल जैसी छाया थे
जिसने हजारों-लाखों झारखंडियों को धूप और अन्याय से बचाया।

मेरे बाबा की शुरुआत बहुत साधारण थी।
नेमरा गांव के उस छोटे से घर में जन्मे,
जहाँ गरीबी थी, भूख थी, पर हिम्मत थी।

बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया
जमींदारी के शोषण ने उन्हें एक ऐसी आग दी
जिसने उन्हें पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया।

मैंने उन्हें देखा है
हल चलाते हुए,
लोगों के बीच बैठते हुए,
सिर्फ भाषण नहीं देते थे,
लोगों का दुःख जीते थे।

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बचपन में जब मैं उनसे पूछता था:
“बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं?”
तो वे मुस्कुराकर कहते:

“क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा
और उनकी लड़ाई अपनी बना ली।”

वो उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी,
न संसद ने दी – झारखंड की जनता के दिलों से निकली थी।

‘दिशोम’ मतलब समाज, ‘गुरु’ मतलब जो रास्ता दिखाए।

और सच कहूं तो  बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया,
हमें चलना सिखाया।

बचपन में मैंने उन्हें सिर्फ़ संघर्ष करते देखा,
बड़े बड़ों से टक्कर लेते देखा  मैं डरता था
पर बाबा कभी नहीं डरे। वे कहते थे:

“अगर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना अपराध है,
तो मैं बार-बार दोषी बनूंगा।”
बाबा का संघर्ष कोई किताब नहीं समझा सकती।
वो उनके पसीने में, उनकी आवाज़ में,
और उनकी चप्पल से ढकी फटी एड़ी में था।

जब झारखंड राज्य बना,
तो उनका सपना साकार हुआ
पर उन्होंने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना।

उन्होंने कहा: “ये राज्य मेरे लिए कुर्सी नहीं  यह मेरे लोगों की पहचान है।”
आज बाबा नहीं हैं,
पर उनकी आवाज़ मेरे भीतर गूंज रही है।

मैंने आपसे लड़ना सीखा बाबा, झुकना नहीं।
मैंने आपसे झारखंड से प्रेम करना सीखा
बिना किसी स्वार्थ के।
अब आप हमारे बीच नहीं हो,
पर झारखंड की हर पगडंडी में आप हो।

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हर मांदर की थाप में, हर खेत की मिट्टी में,
हर गरीब की आंखों में आप झांकते हो।
आपने जो सपना देखा
अब वो मेरा वादा है।

मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा,
आपके नाम को मिटने नहीं दूंगा।
आपका संघर्ष अधूरा नहीं रहेगा।
बाबा, अब आप आराम कीजिए।
आपने अपना धर्म निभा दिया।
अब हमें चलना है

आपके नक्शे-कदम पर।
झारखंड आपका कर्ज़दार रहेगा।
मैं, आपका बेटा, आपका वचन निभाऊंगा।
वीर शिबू जिंदाबाद – ज़िन्दाबाद, जिंदाबाद
दिशोम गुरु अमर रहें। जय झारखंड, जय जय झारखंड।

शिबू सोरेन के छोटे बेटे बसंत ने भी कुछ ऐसा ही दुख व्यक्त किया।

बसंत सोरेन ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, “बाबा…आप चले गए, पर आपकी छाया, आपके संस्कार और आपके सपने हमेशा मेरे साथ रहेंगे। मैं निःशब्द हूं… आज सिर्फ आपका आशीर्वाद और आपकी यादें हैं। ॐ शांति।”

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वहीं, शिबू सोरेन की बड़ी बहू और पार्टी से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुईं सीता सोरेन भी अपने ससुर की मौत पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, बाबा सिर्फ हमारे घर के मुखिया नहीं थे। वे हमारे जीवन के प्रकाश थे। हमारे अपने, हमारे मार्गदर्शक और हमारे सबसे बड़े सहारे। अज वो हमारे बीच नहीं हैं तो ऐसा लग रहा है जैसे एक पूरा युग खत्म हो गया हो।

पिता के निधन के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब हेमंत सोरेन ने कहा कि आज बहुत दुखद दिन है। आदिवासियों के नेता दिशोम गुरु अब हमारे बीच नहीं रहे। ऐसे महान व्यक्ति के चले जाने से मुझे दो दर्द हो रहा है, उसे व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

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