बिहार वोटर वेरिफिकेशन के दौरान बोले जस्टिस धूलिया- ‘मेरे पास भी बर्थ सर्टिफिकेट नहीं’

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July 12, 2025

SIR पर सुप्रीम कोर्ट में उठे कई बड़े सवाल, बिहार में मृत व्यक्तिों के भरे जा रहे हैं फॉर्म

डेस्कः बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अब तक तीन चौथाई मतदाताओं ने अपने गणना फॉर्म जमा कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग द्वारा पुनरीक्षण में आधार कार्ड को दस्तावेजों की सूची से बाहर करने का विरोध जताया है।

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हर किसी से दस्तावेज मांगना कहां तक सही? — सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस का चुनाव आयोग पर तीखा सवाल
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया ने सुनवाई के दौरान बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए मांगे गए दस्तावेजों की सूची पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, ‘इस देश में जहां लोगों के पास बुनियादी दस्तावेज नहीं हैं, हर किसी से सारे काग़ज़ात कैसे मांगे जा सकते हैं? मेरे पास भी जन्म प्रमाणपत्र नहीं है’।
चुनाव आयोग किन दस्तावेजों की मांग कर रहा है?

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चुनाव आयोग द्वारा जारी फॉर्म में ‘संकेतात्मक लेकिन पूर्ण नहीं’ सूची शामिल की गई है। इसका उद्देश्य है कि व्यक्ति की जन्मतिथि, जन्मस्थान और निवास स्थान को प्रमाणित करना है।
इस फॉर्म पर पहले से ही मतदाता EPIC नंबर (वोटर ID) प्रिंट होता है, और इसके अलावा आधार नंबर दर्ज करने के लिए भी अलग से स्थान दिया गया है।इससे साफ होता है कि आधार और वोटर ID को पहचान के जरूरी दस्तावेज माना तो जा रहा है, लेकिन फिर भी लोगों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि चुनाव आयोग द्वारा अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग से गरीब और दूर-दराज के इलाके में रहने वाले लोगों,प्रवासी मजदूरों और उन लोगों के लिए खतरा हो सकता है, जिन्होंने हाल के सालों में बाढ़ की वजह से सब कुछ अपना खो दिया हो।

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