डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय ऑटोमोबाइल पर भारी टैक्स लगाते हुए पच्चीस प्रतिशत टेैरिफ लगा दिया है । भारत के ऑटोमोबिल उद्योग को इससे भारी नुकसान हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को ‘लिबरेशन डे’ के रूप में घोषित करते हुए कई नए टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। इनमें विदेशी निर्मित ऑटोमोबाइल्स पर 25% शुल्क और उन देशों पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ शामिल हैं जो अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क लगाते हैं। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी उद्योग को पुनर्जीवित करना और व्यापार असंतुलन को कम करना है, लेकिन इससे वैश्विक चिंता और मिश्रित घरेलू प्रतिक्रियाएं उत्पन्न हुई हैं।
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो के अनुसार, इन टैरिफ से वार्षिक रूप से $600 बिलियन की राजस्व प्राप्ति की उम्मीद है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे बड़ा कर वृद्धि होगी। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि ये टैरिफ मुद्रास्फीति बढ़ा सकते हैं और व्यापार युद्ध का जोखिम पैदा कर सकते हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सहयोगी देशों ने संभावित प्रतिशोधी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।
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