प्रयागः महाकुंभ 2025 का आरंभ हो चुका है । पौष पूर्णिमा के पहले ही प्राचीन शहर प्रयागराज के संगम पर पहले ही दिन करीब डेढ़ करोड़ लोगों ने डूबकी लगाई है। । दुनिया भर से सनातन धर्म के मानने वाले प्रयाग में इस महाकुंभ में स्नान करने के लिए आ रहे हैं । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “पौष पूर्णिमा की बधाई। विश्व के विशालतम आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समागम ‘महाकुम्भ’ का आज से तीर्थराज प्रयागराज में शुभारंभ हो रहा है। अनेकता में एकता की अनुभूति के लिए, आस्था एवं आधुनिकता के संगम में साधना एवं पवित्र स्नान के लिए पधारे सभी पूज्य सन्तों, कल्पवासियों, श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत है। माँ गंगा आप सभी की मनोकामना पूर्ण करें। महाकुम्भ प्रयागराज के शुभारंभ एवं प्रथम स्नान की मंगलमय शुभकामनाएं। सनातन गर्व-महाकुम्भ पर्व”

मानवता के मंगलपर्व ‘महाकुम्भ 2025’ में ‘पौष पूर्णिमा’ के शुभ अवसर पर संगम स्नान का सौभाग्य प्राप्त करने वाले सभी संतगणों, कल्पवासियों, श्रद्धालुओं का हार्दिक अभिनंदन।
प्रथम स्नान पर्व पर आज 1.50 करोड़ सनातन आस्थावानों ने अविरल-निर्मल त्रिवेणी में स्नान का पुण्य लाभ अर्जित किया।…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 13, 2025
देश-विदेश से जुटेंगे करोड़ो श्रद्धालु
हर 12 वर्षों में आयोजित होने वाला महाकुंभ मेला इस वर्ष जनवरी में प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर होगा। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं। इस बार मेले में लॉरिन पॉवेल जॉब्स, जो एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी हैं, भी शामिल हुईं।

माननीय प्रधानमंत्री जी सन २००१- २००२ में जब अटल जी का शासन था तब उप्र के बागपत में सिनौली गांव में कुछ पुरातत्व छात्रों को खुदाई में महाभारतकालीन तलवारें कंकाल आदि मिले थे अकस्मात
उसके बाद @ASIGoI ने वहां खुदाई की और बाकी अवशेष निकाले https://t.co/ZIzBmosSMr— devashish (@devashish1505) January 13, 2025
मुख्य स्नान की तिथियां
महाकुंभ के दौरान पांच प्रमुख स्नान होंगे। पहला स्नान पौष पूर्णिमा (15 जनवरी) को होगा। इसके बाद तीन शाही स्नान होंगे – मकर संक्रांति (16 जनवरी), मौनी अमावस्या (29 जनवरी), और बसंत पंचमी (3 फरवरी)। अंतिम दो प्रमुख स्नान मग पूर्णिमा (12 फरवरी) और महाशिवरात्रि (26 फरवरी) को होंगे।
डिजिटल कुंभ: नई तकनीक का उपयोग
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार के महाकुंभ को “डिजिटल कुंभ” घोषित किया है। नौ अलग-अलग मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किए गए हैं, जिनमें कुंभ सहायक चैटबॉट और गूगल मैप्स के साथ एकीकृत नक्शे शामिल हैं। इसके अलावा, क्यूआर-आधारित पास प्रबंधन प्रणाली भी लागू की गई है।
आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों को साइबर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में सहायता के लिए नियुक्त किया गया है। वे सोशल मीडिया पर अफवाहों और धोखाधड़ी को रोकने के लिए निगरानी कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर ने एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है, जहां से संभावित डिजिटल खतरों की पहचान की जा रही है।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद के साथ, 2,750 सीसीटीवी कैमरे और 268 एआई-आधारित वीडियो एनालिटिक्स सिस्टम लगाए गए हैं। इनसे भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, 700 नावों पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें तैनात की गई हैं।
प्रयागराज की तैयारी
महाकुंभ के लिए प्रयागराज शहर का कायाकल्प किया जा रहा है। रेलवे ने “पेंट माय सिटी” अभियान के तहत स्टेशन और शहर को सजाने का काम किया है। साथ ही, 240 एआई-आधारित सिस्टम वाहनों की गिनती और भीड़ का आकलन करने के लिए लगाए गए हैं।
सामाजिक और धार्मिक महत्व
महाकुंभ 2025 न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। अखाड़ों की पेशवाई और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन को और भी खास बनाते हैं।




