हेमंता बिस्व सरमा का टॉस्क पूरा करने में बाबूलाल मरांडी की भद्द पीट गई, सभा में सुनने के लिए नहीं पहुंचे गिनती के भी लोग

हेमंता बिस्व सरमा का टॉस्ट पूरा करने में बाबूलाल मरांडी की भद्द पीट गई, सभा में सुनने के लिए नहीं पहुंचे गिनती के भी लोग

रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी फिर से मैदान में है। उसके बड़े नेता घूम घूम कर बांग्लादेशी घुसपैठ मुद्दे को गर्म रखना चाह रहे है। विधानसभा चुनाव में शिकस्त खाने के अगले ही दिन झारखंड बीजेपी के चुनाव सह प्रभारी हेमंता बिस्व सरमा ने वीडियो संदेश जारी कर बांग्लादेशी घुसपैठ का मामला जनता के बीच उठाये रहने का निर्देश दिया था।

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विधानसभा चुनाव के परिणाम बताते है कि राज्य की जनता ने बीजेपी के बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे को नकार दिया। जमीन स्तर पर चुनाव में ये मुद्दा नहीं बन सकता सिर्फ मीडिया के अंदर ही इस मामले ने सुर्खियां बटोरी। जो मामला विधानसभा चुनाव में पीट चुका हो उसे झारखंड में बीजेपी के नेता हेमंता बिस्व सरमा के टॉस्क को देखते हुए एक बार फिर से जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रहे। इसमें एक और नया विषय जोड़ दिया गया है कि झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे। झारखंड बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र राय ने मंगलवार को रांची में प्रेस कांफ्रेंस कर इस बात पर जोर दिया।

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वहीं दूसरी ओर हेमंता बिस्व सरमा से मिले टॉस्क को पूरा करने प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी मनोनीत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट पहुंचे लेकिन वहां से जो तस्वीर सामने आई वो बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक कद को घटने के संकेत दे रहे है। बाबूलाल मरांडी बरहेट के पेटकसा में एक सभा को संबोधित करने पहुंचे तो वहां गिनती करने लायक भी लोग उनको सुनने नहीं आये। इस दौरान राजमहल से बीजेपी के पूर्व विधायक अनंत ओझा और बरहेट से बीजेपी उम्मीदवार रहे गमलिया हेंब्रम भी मौजूद थे। बाबूलाल को सुनने के लिए इतने कम लोग आएंगे इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी, इससे ज्यादा लोग तो किसी नुक्कड़ सभा में मौजूद होता है। झारखंड बीजेपी के सबसे बड़े नेता की जनसभा में भीड़ नहीं होना पार्टी के लिए और झारखंड की वर्तमान राजनीति के लिए चिंता का विषय है, ऐसा लग रहा है कि झारखंड में बीजेपी के पास ऐसा कोई नेता नहीं है जिसकी पब्लिक अपील हो जिसने देखने और सुनने को जनता आ सके। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को इसपर गंभीरता से सोचना होगा। एक तरफ जहां जेएमएम की नेता और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन और जेएलकेएम के सुप्रीमो जयराम महतो को देखने और सुनने के लिए झारखंड के किसी भी इलाके में लोग आ जाते है ऐसी स्थिति में बीजेपी के पास इस तरह के नेता का नहीं होेना चिंता का विषय है।

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