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नहीं रहीं लोकगायिका शारदा सिन्हा, छठ महापर्व की नहाय खाय के दिन ली अंतिम सांस

लोकगायिका शारदा सिन्हा की हालत गंभीर, वेंटिलेटर पर की गई शिफ्ट

दिल्ली: पद्म पुरस्कार से सम्मानित बिहार की लोकप्रिय गायिका शारदा सिन्हा का निधन हो गया है। मंगलवार शाम दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। सोमवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन मंगलवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। इस खबर से पूरे देश में उनके चाहने वाले शोक में डूब गए हैं। छठ महापर्व के अवसर पर उनके गाए गीत अभी भी हर ओर गूंज रहे हैं, और उनके निधन की खबर ने इस पर्व को मनाने वालों के बीच गहरा दुःख भर दिया है।

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हाल ही में उनके पति ब्रज किशोर को ब्रेन हैमरेज हो गया था जिसकी वजह से उनकी 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। मीडिया रिपोट्स के अनुसार, दिग्गज लोक गायिका Sharda Sinha को पिछले कुछ दिनों से खाने-पीने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।छठ महापर्व को लेकर गाये गए शारदा सिन्हा की गीत के उन्हे देशस्तर पर काफी ख्याती दी थी।

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शारदा सिन्हा के बेटे ने अस्पताल से संदेश दिया था कि उनकी मां की हालत बेहद गंभीर और वेंटिलेटर से लौटना बहुत मुश्किल लग रहा है।

शारदा सिन्हा के गीत बिना छठ पर्व अधूरा

शारदा सिन्हा का संगीत खासकर छठ पर्व, विवाह, होली, और अन्य भारतीय त्योहारों से जुड़े पारंपरिक लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध है। उनके द्वारा गाए गए छठ गीत, जैसे “केलवा के पात पर उगेलन सुरुजमल” और “पहिले पहिल हम कइनी छठी मइया के व्रत”, विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। उन्होंने न केवल बिहार के संगीत को संरक्षित किया है बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कई भाषाओं में लोकप्रिय हैं शारदा सिन्हा

उनकी आवाज में एक अलग ही मिठास और मधुरता है जो श्रोताओं के दिलों में गहरी छाप छोड़ती है। शारदा सिन्हा ने भोजपुरी, मैथिली, और हिंदी में कई गीत गाए हैं और अपने संगीत के जरिए बिहार और उत्तर प्रदेश की संस्कृति का प्रचार किया है।

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पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित

उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा 2018 में “पद्म भूषण” और 1991 में “पद्म श्री” पुरस्कार से भी नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें “संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार” भी मिल चुका है, जो भारतीय संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।

शारदा सिन्हा ने लोकगीत को अलग पहचान दी

शारदा सिन्हा का संगीत न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत में अत्यधिक लोकप्रिय है। उनका योगदान भारतीय लोक संगीत को एक नई पहचान देने में महत्वपूर्ण रहा है। उनकी गायकी में लोक संगीत की सरलता, सौम्यता और मधुरता होती है जो सुनने वालों को हमेशा उनके गीतों के करीब बनाए रखती है।

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