असम-बंगाल के बाद झारखंड में बदल रही डेमोग्राफी चिंता का विषय, असम में हो गई है 40 % मुस्लिम आबादी-हेमंता बिस्व सरमा

असम-बंगाल के बाद झारखंड में बदल रही डेमोग्राफी चिंता का विषय, असम में हो गई है 40 % मुस्लिम आबादी-हेमंता बिस्व सरमा

रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले झारखंड बीजेपी के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान और सह प्रभारी हेमंता बिस्व सरमा लगातार झारखंड के दौरे पर आ रहे है। रविवार को असम के मुख्यमंत्री ने रांची में बीजेपी के विजय संकल्प सभा और अभिनंदन समारोह को संबोधित किया। उसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होने झारखंड के संताल में बदल रही डेमोग्राफी का मुद्दा उठाया और उसपर चिंता जाहिर की।

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हेमंता बिस्व सरमा ने कहा कि घूसपैठ को लेकर कानून है लेकिन झारखंड सरकार उस कानून का पालन नहीं कर रही है। एक एक घूसपैठिये आदिवासी बेटियों के साथ शादी कर रहा है लेकिन कानून का काम नहीं हो रहा है। बीजेपी सरकार आने के बाद आदिवासी बेटियों का घूसपैठ करके आये लोगों के साथ शादी करने के लिए ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जिसमें किसी को शोषण नहीं हो।
इसके बाद असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले घूसपैठिया असम आते है, पश्चिम बंगाल आते है इसके बाद झारखंड, असम, बिहार छत्तीसगढ़ जाते है। जब घूसपैठिये इंटरनेशनल बॉडर से आते है तब इसकी जिम्मेदारी बीएसएफ की होती है, उसके बाद स्टेट गर्वमेंट की जिम्मेदारी होती है। झारखंड हाईकोर्ट ने भी डायरेक्शन दिया है कि डिटेक्ट कीजिये। मै असम में ये काम कर रहा हूं। अगर झारखंड सरकार ये काम नहीं कर सकती तो कुर्सी छोड़ दो , दिल्ली करेगा।

असम के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मेरे लिए बदलती डेमोग्राफी बहुत बड़ा मुद्दा है। मेरे असम में मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत हो गई है, 1951 में ये 12 प्रतिशत थी। हम जिला के जिला खो चुके है। मेरे लिए ये मुद्दा राजनीतिक नहीं है, मेरे लिए ये जीना और मरने का मुद्दा है, मै इसके लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करूंगा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “दो धर्म के लोगों के बीच में शादी होती है तो वे विशेष विवाह अधिनियम के तहत होती है। आज यहां घुसपैठिये आकर आदिवासी बेटियों से शादी कर रहे हैं। एक मुसलमान को 4 शादी करने की अनुमति है लेकिन एक मुसलमान और हिंदू की शादी के बाद आप अपने निजी कानून के हिसाब से नहीं चल पाएंगे। आपको दोनों धर्म के हिसाब से चलना पड़ेगा। इस विषय को नजर में रखते हुए हमें झारखंड के लिए कानून बनाना पड़ेगा। हमें झारखंड की माता-बेटियों का अधिकार सुरक्षित रखना पड़ेगा।”

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