मोदी और चंपाई सरकार रत्तो देवी को पंखा झलने का बनाने दे रही है वर्ल्ड रिकॉर्ड ,  40 वर्षों से हाथ में चिपका है पंखा !  इस गांव के बच्चे पूछते हैं – मां हमारे घर कब आएगी बिजली ?

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Live Dainik

June 25, 2024

Giradih bijli

गिरिडीहः रत्तो देवी को लगता है कि जैसे उनका जन्म पंखा झलने के लिए ही हुआ है । उनके हाथों में पंखा कब से है याद नहीं है । वो चौबिसों घंटे यही काम करती हैं। खासतौर से गर्मियों में तो उनके हाथों से जैसे पंखे चिपक जाते हैं । ऐसा नहीं है कि  रत्तो देवी इस हाथ पंखे से आजादी नहीं चाहती । मगर बीजेपी और जेएमएम के गठबधंन ने इन्हें मजबूर कर रखा है । भीषण गर्मी में रत्तो देवी  का हाथ मशीन की तरह चलता रहता । कभी खुद के लिए कभी खुदे के बच्चों के लिए । आप पूछेंगे रत्तो देवी के घर बिजली नहीं है क्या , क्या वो एक इलेक्ट्रिक फैन भी नहीं लगवा सकती । यही सवाल रत्तो देवी भी पूछती है । क्या उन्हें उनकी जमीन से निकले कोयले से बनी बिजली को पाने का हक है या नहीं, क्या उनके बच्चें भी उनकी तरह उधार की रोशनी में पढ़कर और हाथ पंखे के सहारे ही भीषण गर्मी झेलते हुए बड़े होंगें ।

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नेहरू से मोदी तक बिजली का इतंजार

रत्तो देवी गिरिडीह के भुराही आदिवासी टोले में रहती है । इस टोले में आज तक बिजली नहीं पहुंची ।  नेहरू के तीन बार प्रधानमंत्री बनने के  बाद भी नहीं और नरेंद्र मोदी के 3.0 संस्करण के बाद भी बिजली नहीं  पहुंची । रत्तो देवी भुराही टोले की उन दर्जनों आदिवासी महिलाओं में एक हैं जिन्होंने आज तक बिजली का स्वीच ऑन नहीं किया ।  पंखे के नीचे नहीं बैठी और अपने घर में बल्ब नहीं देखा ।  उनके बच्चों का भी यही हाल था और बच्चों के बच्चे तक मोबाइल की रोशनी तो पहुंची है लेकिन उसके लिए पड़ोस के गांव में जाकर चार्ज करना पड़ता है ।

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बीजेपी के सांसद और जेएमएम के हैं विधायक

गिरिडीह का भुराही आदिवासी टोला आजाद हिन्दुस्तान के गाल पर तमाचे से कम नहीं । सांसद बीजेपी के हैं  चंद्रप्रकाश चौधरी और विधायक हैं झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुदिव्य सोनू । चंद्रप्रकाश के नाम में भी प्रकाश शब्द है और सुदिव्य सोनू के नाम में दिव्यता झलकती है मगर अपने नाम का इज्जत तक नहीं रख पा रहे हैं इलाके के विधायक और सांसद  ।  भुराही के आदिवासी टोले के लोगों ने अंधेरे को ही अपनी किस्मत मान अपनी दिनचर्या बना ली है । सूरज ढलते ही ढिबरी की रोशनी होती है और तेल खत्म होते ही हर हाल में नींद में जाने की मजबूरी ।  बच्चे पढ़ते तो हैं लेकिन ब से बिजली नहीं और E से electricity पढ़ते वक्त किताबें झूठी लगने लगती हैं ।

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मां कब आएगी बिजली…

रोहित और उसके जैसे दूसरे बच्चों के हाथों में पढ़ते वक्त एक हाथ में टॉर्च और दूसरे हाथ में कलम होती है । कभी-कभी रोहित पड़ोस के गांव में बिजली के बल्ब और पंखे को देखने जाता है और घर में आकर पूछता है- मां हमारे घर कब आएगी बिजली ?

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