मॉब लिंचिंग विधयेक में भीड़ की परिभाषा से राज्यपाल असहमत, राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेजा गया

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April 10, 2024

रांची : राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मॉब लिंचिंग विधेयक को राष्ट्रपति द्रोपर्दी मुर्मू के पास विचारार्थ भेज दिया है। इससे पहले पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने अनुच्छेद 200 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए विधेयक सरकार को वापस लौटा दिया था। राज्यपाल ने विधेयक में मॉब लिंचिंग की परिभाषा पर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन सरकार ने विधेयक में मॉब की परिभाषा को संशोधित करने से इंकार करते हुए राज्यपाल के पास स्वीकृति के लिए भेज दिया था।
सरकार द्वारा भेजे गये मॉब लिंचिंग की परिभाषा को संशोधित किये बिना ही स्वीकृति के लिए भेजे गये विधेयक की समीक्षा और उस पर कानूनी राय लेने के बाद राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति के विचारार्थ भेज दिया। विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 2001 में निहित प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेजे जाने का प्रमुख कारण मॉब की परिभाषा का कानून-सम्मत नहीं होना बताया गया है। सरकार द्वारा स्वीकृति के लिए भेजे गये झारखंड भीड़ हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग विधेयक 2021 में दो या दो से अधिक व्यक्तियों के किसी समूह को मॉब या भीड़ के रूप में परिभाषित किया गया है।
राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेजे गये विधेयक में यह कहा गया है कि देश में लागू भारतीय दंड संहिता में पांच या पांच से अधिक लोगों के उग्र समूह को मॉब या भीड़ के रूप में परिभाषित किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बनायी गयी भारतीय न्याय संहिता में भी पांच या पांच से अधिक लोगों के उग्र समूह को मॉब या भीड़ के रूप में परिभाषित किया गया है। इस तरह झारखंड विधानसभा से पारित विधेयक में मॉब या भीड़ की परिभाषा कानून-सम्मत नहीं है। ऐसी स्थिति में इस पर राष्ट्रपति द्वारा विचार किया जाना ही बेहतर होगा।

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