पटनाः बिहार में बक्सर से कहलगांव तक गंगा में उफान के बाद एहतियात के तौर पर फरक्का बराज के सभी 108 गेट खोल दिये गये हैं। पटना और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा सोमवार की रात फरक्का में भी लाल निशान को पार कर गई। मंगलवार की शाम पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेमी जबकि फरक्का में 20 सेमी ऊपर था। इससे तटबंधों पर दबाव बना है। जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की निगरानी के लिए 600 तटबंध सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं। पड़ोसी राज्यों में भारी बारिश के बाद गंगा का जलस्तर बक्सर से फरक्का तक बढ़ रहा है।
वंदे भारत के सामने आ गया शख्स, टकराने से ट्रेन के इंजन का कवर टूटा
बक्सर में तो नदी का जलस्तर बीते साल की तुलना में छह मीटर से अधिक ऊपर है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में इस अवधि में गंगा नदी में बीते 15 वर्षों में इतना पानी कभी नहीं आया। जुलाई के पहले सप्ताह में गंगा में पिछले साल के मुकाबले पांच मीटर अधिक पानी था। सिर्फ पटना में ही गंगा बीते साल से दो मीटर ऊपर बह रही थी।
इन 9 जिलों में बाढ़ का खतरा, सुरक्षा कर्मी तैनात
बिहार के नौ जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इनमें बक्सर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, मुंगेर, बेगूसराय, कटिहार और भागलपुर शामिल हैं। नेपाल के तराई वाले इलाकों में भारी बारिश के बाद कोसी और बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर है। बूढ़ी गंडक खगड़िया में खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। कोसी सुपौल व सहरसा में मंगलवार की देर शाम लाल निशान के पार पहुंच गयी है। उधर, सरकार ने गंगा के तटबंध की निगरानी के लिए प्रत्येक एक किलोमीटर पर एक-एक सुरक्षाकर्मी (600 तटबंध सुरक्षाकर्मी) को तैनात किया गया है।
45 से अधिक कनीय अभियंताओं को भी सतत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। विभाग के वरीय अभियंता के नेतृत्व में तटबंध की रात्रि पेट्रोलिंग भी शुरू कर दी गयी है। फरक्का बराज के गेट खोलने के बाद गंगा का पानी तेजी से निकलने लगा है। हालांकि, गंगा नदी में अप्रत्याशित जलस्राव के कारण बक्सर, पटना, मुंगेर, भागलपुर के दियारा इलाकों में पानी का फैलाव हो रहा है। कई इलाके जलमग्न हैं।
SIR पर चुनाव आयोग की ओर से बड़ा अपडेट, बिहार में वोटर लिस्ट से हटाएं जाएंगे 51 लाख मतदाताओं का नाम
भागलपुर में गंगा-कोसी उफान पर
भागलपुर के सीमांचल और पूर्वी बिहार के कुछ जिलों में गंगा-कोसी समेत उनकी सहायक नदियां उफान पर हैं। कटिहार में गंगा, कोसी बरंडी, कारी कोसी का जलस्तर बढ़ रहा है और खतरे के निशान से ऊपर है। जबकि महानंदा नदी के अप स्ट्रीम में जलस्तर स्थिर है, लेकिन डाउनस्ट्रीम में वृद्धि हो रही है।
गंगा की तेज धारा से कटाव की वजह से भागलपुर जिले के सबौर, कहलगांव और पीरपैंती में कृषि योग्य भूमि नदी में समा रही है। उधर, मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बरियारपुर विद्युत सबस्टेशन के निचले भाग में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। कहलगांव में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 26 सेमी ऊपर पहुंच गया है। आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता नुरुल ऐन ने बताया कि जिले में जलस्तर बढ़ने से किसी भी प्रकार की धनहानि या जनहानि नहीं हुई है।
कुरसेला के कुछ गांवों की मुख्य सड़क पर नदी का पानी फैल गया है। आवागमन के लिए चार सरकारी नावों का परिचालन किया जा रहा है। अमदाबाद प्रखंड मुख्यालय के आसपास गांव के जोड़ने वाली सड़क पर नदी का पानी फैलने से आवागमन प्रभावित हुआ है। गंगा, कोसी और बरंडी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। मंगलवार सुबह जलस्तर में वृद्धि होने के बाद महानंदा नदी स्थिर हो गई है।
मगर महानंदा नदी का जलस्तर डाउनस्ट्रीम में चेतावनी स्तर से करीब 21 सेमी ऊपर है। सुपौल में कोसी का जलस्तर घटने लगा है। खगड़िया जिले में गंगा और गंडक खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। पिछले 24 घंटे में गंगा में 40 व बूढ़ी गंडक नदी में 25 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत विष्णुपुर, तेमथा आदि गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। गंगा नदी के जलस्तर में तेज गति से वृद्धि से बाढ़ का पानी प्रखंड के निचले गांवों में प्रवेश कर चुका है I
माधवपुर पंचायत के विष्णुपुर, तेमथा करारी के मुस्लिम टोला, शर्मा टोला आदि जलमग्न हो गया है I इसके अलावा प्रखंड के आधा दर्जन से अधिक प्राथमिक व मध्य विद्यालय परिषर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है I वही जीएन बांध के बाहर बसे लोगो को भी चिंता बढ़ गई है। दियारा जाने वाले कई रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं।
आखिर उपराष्ट्रपति के पद से जगदीप धनखड़ को क्यों देना पड़ा इस्तीफा? क्रोनोलॉजी से समझिए इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी
किशनगंज में उच्चस्तरीय पुल का एप्रोच पथ का बारिश से धंसा
दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र के लोहागाड़ा पंचायत अंर्तगत मलमली बानटोली आदिवासी टोला के समीप सिकेंद्रा धार पर नाबार्ड योजना के तहत बने उच्चस्तरीय पुल का एप्रोच पथ बारिश के कारण धंस गया। पिछले कई दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश की वजह से सिकेंद्रा धार पर पानी जमा हो गया है। धार में पानी भरते ही पुल के एप्रोच पथ पर डाली गयी मिट्टी ढीली होकर धंसने लगी है।
ऐसे में पिछले कई दिनों से मरम्मत का काम जारी रहने के बाबजूद नीचे मिट्टी पूरे तरीके से ढीली पड़ने से एप्रोच दबने व मरम्मत के कार्य में दरार पड़ना लगातार जारी है। ग्रामीण कार्य विभाग के जेई बिनोद कुमार ने बताया कि अभी पुल निर्माण का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। सितंबर तक काम पूरा होना था, लेकिन इस बीच बारिश आ जाने से बगल से बने डायवर्जन पर पानी जमा हो गया था। लोगों का आवागमन बाधित न हो इसको लेकर जल्दबाजी में एप्रोच का काम करा आवागमन चालू किया गया था। उन्होंने बताया कि अभी एप्रोच का काम पूरा होना बाकी है।
अररिया: फारबिसगंज में सीताधार पुल का एप्रोच स्लैब धंसने से आवागमन प्रभावित
फारबिसगंज आईटीआई के सामने हाईवे स्थित सीताधार पुल का एप्रोच स्लैब मंगलवार को धंसने से आवागमन प्रभावित हो गया है। हालांकि रिपेयरिंग का कार्य जारी है। तब तक सर्विस लेन से वाहनों को गुजरना पड़ रहा है। यह पुल काफी पुराना है और प्रत्येक वर्ष इस पर मेंटेनेंस कार्य होता रहा है। इस संबंध में एनएचएआइ पूर्णिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण कुमार ने बताया कि पुल के एप्रोच कनेक्ट के पास एप्रोच स्लैब होता है जो मिट्टी पर रखा जाता है। यह मेंटेनेंस वर्क है। बारिश से थोड़ा स्लैब के दबने से झटका लग रहा था। इन समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। दो दिनों के अंदर कार्य पूरा हो जाएगा और आवागमन चालू हो जाएगा।


