रांचीः असम सरकार आदिवासियों की जमीन को सीमेंट फैक्टरी के लिए दे रही है, वो भी तीन हजार बीघा। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जैसे ही सुना तो हैरान हो गए । जज साहब ने पूछा पूरा जिला सीमेंट फैक्टरी को दिया जा रहा है ? सीमेंट फैक्टरी की वकील समझाने की कोशिश करती रही लेकिन जस्टिस संजय कुमार मेधी ने छठी अनुसूचि में संरक्षित दीमा हसाओ जिले की जमीन को सीमेंट फैक्टरी के देने के बारे में सुना तो हैरान रह गए ।
SHOCKING!!
Adani was given 3,000 bigha (81 million sqft) by the Assam BJP government for cement factory.
Even the High Court Judge was taken aback:
“Is this a joke?”
Are you giving a whole district?” pic.twitter.com/unRkBYrEgd
— 𝓝𝓱 𝓒𝓲𝓷𝓰 (@NhCing) August 17, 2025
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने Sonesh Hojai की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में सीमेंट कंपनी की ओर से पेश हुए वकील को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस संजय कुमार मेधी ने पूरे दीमा हसाओ जिले की ज़मीन सीमेंट फैक्ट्री लगाने के लिए आवंटित किए जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्थानीय जनजातियों के अधिकार और हित सर्वोपरि हैं। विवादित भूमि उमरांगसो क्षेत्र में स्थित है, जो अपने गर्म पानी के झरनों, प्रवासी पक्षियों के ठहराव और समृद्ध वन्यजीव के लिए जाना जाता है।
“3,000 बीघा! पूरा जिला?”
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में अदालत की कार्यवाही दिखाई दे रही है। इसमें जज सबसे पहले कंपनी का नाम पूछते हैं। वकील जवाब देती हैं, “महाबल सीमेंट। सीमेंट कंपनी।” जज पूछते हैं कि क्या कंपनी को ज़मीन आवंटित की गई है। इस पर वकील पुष्टि करती हैं—“3,000 बीघा का आवंटन।”
जज यह सुनकर अविश्वास में बार-बार आंकड़ा दोहराते हैं और कहते हैं—“पूरा जिला…।”
वकील मानती हैं कि उन्हें ज़मीन के पूरे दायरे की जानकारी नहीं है।
“3,000 बीघा एक प्राइवेट कंपनी को? यह कोई मज़ाक है?”
बंजर जमीन बताया
वकील सफाई देती हैं कि यह ज़मीन फैक्ट्री लगाने के लिए चाहिए और इसे “बंजर ज़मीन” बताया जाता है। लेकिन जस्टिस मेधी ने तीखी टिप्पणी की—“हमें पता है कितनी बंजर है। 3,000 बीघा! किस तरह का फ़ैसला है यह? 3,000 बीघा… यह मज़ाक है क्या?”
टेंडर के जरिए मिली है लीज
जब वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को इसकी ज़रूरत है, तो जज ने सख़्ती से जवाब दिया—“जनहित सर्वोपरि होना चाहिए।” कंपनी की ओर से यह दलील भी दी गई कि वे किसी की ज़मीन हड़पना नहीं चाहते, बल्कि टेंडर के ज़रिए उन्हें माइनिंग लीज़ मिली है।
इस पर अदालत ने नाराज़गी जताते हुए नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनॉमस काउंसिल (NCHAC) को निर्देश दिया कि वह महाबल सीमेंट्स को ज़मीन आवंटन की पूरी नीति और दस्तावेज़ अदालत में पेश करे। यह मामला अब 1 सितंबर को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। अदालत फिलहाल दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है—एक स्थानीय लोगों की ओर से, जिन्होंने अपने बेदखली को चुनौती दी है, और दूसरी महाबल सीमेंट्स की, जिसमें कंपनी ने अपने काम में बाधा डालने वालों से सुरक्षा मांगी है।




