लोहरदगा : झारखंड के लोहरदगा मंडल कारा में बंद एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बुधवार को जिले का माहौल तनावपूर्ण हो गया। कुडू थाना क्षेत्र के पंडरा गांव निवासी 27 वर्षीय जाहिद पवरिया की जेल के अंदर पुरुष वार्ड में हुई मौत को लेकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने कुडू में राष्ट्रीय उच्च मार्ग को जाम कर न्यायिक जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग की। करीब दो घंटे तक चले सड़क जाम के बाद प्रशासन के आश्वासन पर सड़क जाम समाप्त हुआ।घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड गठित कर वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम कराया है। साथ ही जांच के आदेश भी दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल बोर्ड की राय और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे। लोगों की जुबान पर यह बात आई कि यदि कैदी रात तक सामान्य था तो सुबह उसकी मौत कैसे हुई? क्या मौत स्वाभाविक थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है? जेल परिसर में मौजूद सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और जांच इन सभी सवालों से पर्दा उठाएगी।फिलहाल प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है, जबकि मृतक का परिवार न्याय और दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अडिग है। ऐसे में अब पूरे मामले की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।

सुबह नमाज के समय सामने आई घटना
जानकारी के अनुसार जाहिद पवरिया 20 मई 2026 से यौन शोषण के एक मामले में न्यायिक हिरासत के तहत लोहरदगा मंडल कारा में बंद था। उसके खिलाफ कुडू थाना में 29 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-69 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। बुधवार सुबह पुरुष वार्ड में नमाज के लिए कैदियों को जगाने पहुंचे अतिकुर रहमान ने देखा कि जाहिद किसी भी आवाज का जवाब नहीं दे रहा है। उन्होंने तत्काल जेल प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद जेलर मोहम्मद सोनू मौके पर पहुंचे और बिना देर किए उसे सदर अस्पताल भेजा गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना सुबह करीब आठ बजे परिवार को दी गई। इसके बाद सदर अस्पताल में परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। अस्पताल परिसर में पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

रात तक पूरी तरह सामान्य था कैदी
जेल प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक जांच में किसी तरह की असामान्य गतिविधि सामने नहीं आई है। जेलर मोहम्मद सोनू के अनुसार उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में जाहिद मंगलवार रात इशा की नमाज अदा करने के बाद भोजन करता दिखाई दे रहा है। इसके बाद वह अपने वार्ड में जाकर सो गया था। उन्होंने कहा कि सुबह उसे अचेत मिलने के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। जेल मैनुअल के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, जेल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

परिजनों का आरोप- ‘एक दिन पहले मिले थे, बिल्कुल स्वस्थ था
दूसरी ओर मृतक के स्वजन प्रशासन के दावों से संतुष्ट नहीं हैं। मृतक के छोटे भाई मुजाहिद अली ने कहा कि परिवार के लोग एक दिन पहले ही जेल में जाहिद से मिलकर लौटे थे। उस समय वह पूरी तरह स्वस्थ था और किसी प्रकार की बीमारी की शिकायत नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अचानक हुई मौत कई सवाल खड़े करती है। परिजनों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच, जेल परिसर के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने तथा दोषियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक उन्हें प्रशासन की किसी भी बात पर भरोसा नहीं होगा।

हाईवे पर उतरा गुस्सा, दो घंटे तक थमा यातायात
मौत की सूचना गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन कुडू पहुंच गए। देखते ही देखते राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और सड़क जाम कर दी गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि जेल के भीतर हुई मौत की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई प्रदर्शनकारी उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी।



वार्ता के बाद शांत हुए लोग
मौके पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्रद्धा केरकेट्टा, पुलिस निरीक्षक चंद्रशेखर आजाद, कुडू थाना प्रभारी अजीत कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। झामुमो जिलाध्यक्ष मोजम्मिल अहमद और आजसू नेता लाल गुड्डू नाथ शाहदेव ने भी ग्रामीणों से बातचीत कर माहौल शांत कराने की कोशिश की। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी, जेल के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाएगी और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जाम समाप्त किया। हालांकि दिन के दौरान दो बार कुछ देर के लिए फिर आंशिक जाम की स्थिति बनी, लेकिन अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया।
शव लेने से किया इंकार, फिर बनी सहमति
पोस्टमार्टम के बाद भी परिजन तुरंत शव लेने को तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि जांच और मुआवजे को लेकर स्पष्ट आश्वासन मिलने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी की निगरानी तथा अनुमंडल पदाधिकारी अमित कुमार की मौजूदगी में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच वार्ता हुई। प्रशासन ने नियमानुसार हर संभव सहायता और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर गांव रवाना हुए, जहां शाम को अंतिम संस्कार किया गया।
ड्रोन कैमरे को लेकर भी बढ़ा विवाद
सड़क जाम के दौरान पुलिस प्रशासन ड्रोन कैमरे से पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग करा रहा था। ड्रोन को देखकर कुछ प्रदर्शनकारी नाराज हो गए और इसका विरोध शुरू कर दिया। स्थिति को बिगड़ता देख अधिकारियों ने तत्काल ड्रोन संचालन रोकने का निर्देश दिया। थाना प्रभारी अजीत कुमार ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई। इसके बाद विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कराया गया।
मेडिकल बोर्ड और मजिस्ट्रियल जांच से खुलेगा मौत का राज
घटना की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त संदीप कुमार मीना के निर्देश पर तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शंकर प्रसाद, डॉ. सुदामा राम और डॉ. बीके पांडे ने संयुक्त रूप से शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम पूरी तरह वीडियोग्राफी के साथ कार्यपालक दंडाधिकारी अभिनीत कुमार सूरज की मौजूदगी में कराया गया। प्रशासन का कहना है कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम निष्कर्ष, सीसीटीवी फुटेज और मजिस्ट्रियल जांच के आधार पर मौत के कारणों का अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।


