पाकुड़-दुमका के बीच कोयला की ट्रांसपोर्टिंग बंद, काठीकुंड में ग्रामीणों का विरोध तेज,सांसद-विधायक आवास के पास बैठे धरने पर

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June 16, 2025

दुमकाः पाकुड़ जिले के पंचुवाड़ा स्थित कोल माइंस से दुमका रेलवे स्टेशन के पास स्थित रैक तक कोयला ढुलाई का विरोध हो रहा है। ग्रामीणों ने पाकुड़ से दुमका के बीच कोयला ट्रांसपोर्टिंग का काम अनिश्चितकाल के लिए बंद करा दिया गया है। यह रोक काठीकुंड प्रखंड के ग्रामीणों द्वारा किये जा रहे विरोध के चलते लगी है। हालांकि अन्य वाहनों का आवागमन सामान्य है। कोयला ढुलाई बाधित होने से सड़क पर हाईवा और ट्रकों की लंबी कतार लग गई है।

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इधर, ग्राम प्रधान के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण काठीकुंड बाजार के चांदनी चौक के समीप धरने पर बैठ गए हैं। वहीं ग्रामीणों के विरोध-प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद काठीकुंड बीडीओ और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों से अवगत हुए। इसके बाद पदाधिकारियों ने कोयला कंपनी पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (WBPDCL) के अधिकारियों के साथ वार्ता की।ग्रामीणों ने पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। काठीकुंड प्रखंड के शिवतल्ला ग्राम के ग्राम प्रधान जॉन सोरेन के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण अपनी मांगों के समर्थन में चांदनी चौक पर डटे हुए हैं।

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आंदोलनकारियों ने कोयला लदे ट्रकों को धरना स्थल से पहले ही रोकना शुरू कर दिया. इस चक्का जाम से लगभग तीन किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई है। वहीं जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा धरना स्थल पर पहुंचे और अपना समर्थन जताया। आपको बता दें कि धरना स्थल से कुछ ही दूर पर दुमका सांसद नलिन सोरेन और उनके पुत्र विधायक आलोक सोरेन का आवास है। हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें सांसद और विधायक का समर्थन प्राप्त है।

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ग्राम प्रधान जॉन सोरेन ने कहा कि WBPDCL बिना भूमि अधिग्रहण और स्थानीय लोगों की अनुमति के बगैर आदिवासी जमीन का उपयोग कर कोयला खनन और परिवहन कर रही है। हर दिन लगभग 10 हजार ट्रकों से करीब 60 हजार टन कोयला इस मार्ग से ढोया जा रहा है। इससे न केवल सड़कों की हालत बदतर हो गई है, बल्कि भारी मात्रा में उड़ने वाली धूल और डीजल से पैदा होने वाला प्रदूषण लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। कई ग्रामीणों को सांस की बीमारी हो गई है और दुर्घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। यह कोयला परिवहन अव्यवस्थित, असुरक्षित और अन्यायपूर्ण है।

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