रांचीः असम विधानसभा चुनाव के बीच झारखंड में कांग्रेस और जेएमएम के बीच जारी तल्खी को देखते हुए जेडीयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने राज्य के मुख्यमंत्री को एक सलाह के साथ-साथ ऑफर भी दे दिया है जिसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे है। उन्होंने कहा है कि हेमंत सोरेन कांग्रेस और बीजेपी से अलग होकर नई सरकार बनाएं वो समर्थन देने को तैयार है।
आज से नौ अप्रैल तक बिगड़ा रहेगा मौसम, रांची सहित कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 5 डिग्री तक गिरेगा पारा
सरयू राय ने कहा, “हेमंत सोरेन चाहें तो बिना कांग्रेस और भाजपा के सरकार बना सकते हैं। हम जैसे कुछ विधायक उन्हें बिना शर्त समर्थन देंगे।” उन्होंने वर्तमान हालात को देखते हुए ऐसी सरकार बनने की संभावना जताई और झारखंड में बिना कांग्रेस-भाजपा गठबंधन के सरकार बनाने के लिए जरूरी ‘मैजिक नंबर’ भी हेमंत सोरेन को बता दिया. बता दें कि वर्तमान में झारखंड विधानसभा में दलगत स्थिति इस तरह की है, झामुमो 34, आरजेडी के पास 4, लेफ्ट 2, कांग्रेस 16, बीजेपी 21, आजसू 1, जेडीयू 1, जेएलकेएम 1, लोजपाआर 1। सरकार बनाने के लिए कुल 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
हेमंत सोरेन का हिमंता सरकार पर हमला, आदिवासियों को आदिवासियों से लड़ाया जा रहा है, कल्पना ने उठाया न्यूनतम मजदूरी का मामला
उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां JMM ने हिस्सेदारी की मांग की, वहां कांग्रेस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि यह पैटर्न सिर्फ असम तक सीमित नहीं है—बिहार चुनाव के दौरान भी JMM को पर्याप्त तवज्जो नहीं दी गई थी।सरयू राय ने सीधे तौर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सलाह दी कि वे कांग्रेस से अलग होकर नई राजनीतिक राह तलाशें। उनके मुताबिक, जिस तरह दोनों सहयोगी दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, उससे गठबंधन की विश्वसनीयता कमजोर हो रही है।
एक करोड़ के इनामी माओवादी प्रशांत बोस का निधन,5 साल पहले पत्नी संग हुई थी गिरफ्तारी,200 से अधिक वारदातों का था मास्टरमाइंड
उन्होंने कांग्रेस के कुछ बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें झारखंड के अफसरों को “माफिया” कहा गया था। सरयू राय का कहना है कि इस तरह के बयान अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री पर ही सवाल खड़े करते हैं, जो राजनीतिक रिश्तों को और खराब करते हैं।सरयू राय ने हेमंत सोरेन को बिना शर्त समर्थन देने का ऑफर भी दे दिया। उन्होंने संकेत दिया कि झारखंड में “जादुई आंकड़े” के करीब एक नया सत्ता समीकरण बनाया जा सकता है, जिसमें वे खुद और कुछ अन्य विधायक समर्थन देने को तैयार हैं।


