रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रतियोगिता परीक्षाओं में हुई कथित धांधली की सीआईडी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पता चला कि ऑप्टिकल मार्क रीडर शीट(ORM) और ऑन स्क्रीन मार्किंग(OSM) में छेड़छाड़ कर नौकरियां बेची गई। परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड(TDPL) के टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी उस्मान ने पूछताछ में यह खुलासा किया है। उस्मान के अनुसार ओएमआर और ओएसएम में छेड़छाड़ का काम एजेंसी के कर्मचारी हेमंत और संजय करते थे। इन लोगों ने विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में करीब 300 अभ्यर्थियों को पैसे लेकर पास पास कराया है। इनमें फॉरेस्ट रेंज अफसर परीक्षा में 100, जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी में 100 और जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा में करीब 100 अभ्यर्थी शामिल हैं। अब सीआईडी इन बयानों का सत्यापन कर रही है।

ORM और OSM के माध्यम से अंकों में हेरफेर
उस्मान ने बताया कि वह वर्ष 2025 में टीडीपीएल में टेक्निकल सपोर्ट स्टॉफ के रूप में जुड़ा था। प्रदीप कुमार सिंह इंजीनियर पद पर थे, जिनकी देखरेख में ओएमआर प्रोसेसिंग और रिजल्ट प्रकाशन का काम होता था। ओएमआर से संबंधित काम प्रदीप देखता था, जबकि ओएसएम का काम हेमंत संभालता था। ओएमआर और ओएसएम में गड़बड़ी का काम हेमंत और संजय करता था। संजय टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और जेपीएससी की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के संपर्क में रहकर अभ्यर्थियों को साधता था। इस फर्जीवाड़े के दौरान टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और सतपाल सिंह की तकनीकी टीम बाहर से आती थी। उस्मान के पास इन पूरी प्रक्रिया के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी थी, जिसके बदले रामवीर सिंह ने उसे 20 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रलोभन दिया था। उस्मान के अनुसार ओएमआर और ओएसएम के माध्यम से ही अंकों में हेरफेर की गई।








