डेस्कः यूनियन ने प्रबंधन द्वारा विगत 20 से 30 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे श्रमिकों/ठेका श्रमिकों को बिना किसी उचित कारण के हटाए जाने एवं अन्य मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में अपने अधीनस्थ सभी लोकेशनों (उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड) में आंदोलन प्रारंभ कर दिया है।
यूनियन का स्पष्ट मत है कि जिन श्रमिकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 20-30 वर्ष संस्थान की सेवा में लगाए हैं, उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल अमानवीय है, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका को भी गंभीर संकट में डालने वाला है।

यूनियन ने प्रबंधन से मांग की है कि श्रमिकों को हटाने की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए एवं पूर्व में हुए समझौतों/सहमति को लागू किया जाए। यूनियन द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन प्रारंभ किया जा चुका है। आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय परिस्थिति अथवा औद्योगिक अशांति के लिए यूनियन प्रबंधन की उन नीतियों और निर्णयों को जिम्मेदार मानेगी, जिनके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

साथ ही, यदि श्रमिकों की सेवाओं में इस प्रकार की कमी/विस्थापन के कारण तेल/पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति अथवा बाजार में उपलब्धता प्रभावित होती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी प्रबंधन की होगी, क्योंकि यूनियन ने समय रहते इस गंभीर स्थिति से प्रबंधन को अवगत करा दिया है।

यूनियन पुनः स्पष्ट करती है कि उसका उद्देश्य आम जनता को असुविधा पहुंचाना नहीं, बल्कि श्रमिकों के रोजगार, सम्मान, न्यायसंगत अधिकारों एवं पूर्व में किए गए समझौतों के पालन को सुनिश्चित कराना है।

यूनियन प्रबंधन से अपील करती है कि टकराव का रास्ता छोड़कर तत्काल वार्ता के माध्यम से समस्या का सम्मानजनक एवं स्थायी समाधान निकाला जाए। अन्यथा आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए यूनियन अपने लोकतांत्रिक एवं वैधानिक अधिकारों के तहत आवश्यक कदम उठाने के लिए बाध्य होगी।यूनियन के महामंत्री मुकेश कुमार और कोषाध्यक्ष जीतेंद्र कुमार ने Press Release जारी कर दी जानकारी।








