रांचीः जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में कथित तौर पर गड़बड़ी को लेकर पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों और सरकार के बीच शुक्रवार को पहले दौर की बैठक हुई जिसका कोेई नतीजा नहीं निकला। शनिवार को दूसरे दौर की बातचीत होगी। रात करीब 11 बजे एडीएम लॉ एंड ऑर्डर धनंजय कुमार और एसडीओ कुमार रजत धरनास्थल पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों को समझाने का प्रयास किया।वार्ता के दौरान प्रशासन की ओर से छात्रों को उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि उनकी किसी भी मांग पर स्पष्ट सहमति नहीं बनी है और केवल विचार करने की बात कही गई है।
छात्रों ने मौखिक आश्वासन स्वीकार करने से इनकार करते हुए मांगों पर लिखित आश्वासन देने की मांग रखी। लिखित भरोसा नहीं मिलने के कारण छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। देर रात वार्ता के बाद कुछ समय के लिए छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति भी बनी रही। चर्चा थी कि सरकार ने मांगें मान ली हैं, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक लिखित आदेश या आधिकारिक आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना और अनशन जारी रहेगा। अभ्यर्थी न्याय मंच’ का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज, शनिवार सुबह 10:30 बजे सरकार के प्रतिनिधिमंडल से दूसरी बार मुलाकात करेगा।
यह महत्वपूर्ण वार्ता मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित की गई है। शुक्रवार शाम को भी सरकार और छात्रों को बीच पहले दौर की वार्ता हुई थी।छात्र न्याय मंच की ओर से सरकार के समक्ष अपनी बात रखने के लिए 8 प्रतिनिधियों को नामित किया गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:
चंदन कुमार
रामा अवतार महतो
दिनबंधु मंडल
बिमल कुमार
पूजा कुमारी
प्रेम कुमार
रवि शंकर
अमित कुमार शर्मा
उम्मीद जताई जा रही है कि इस वार्ता में अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक चर्चा होगी और भर्ती परीक्षाओं में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए कोई ठोस हल निकल सकेगा। शुक्रवार को छात्रों और सरकार के बीच पहले दौर की बैठक हुई थी।
इधर, शुक्रवार शाम से देर रात तक हुई लगातार बारिश ने धरनास्थल की मुश्किलें और बढ़ा दीं। धरना स्थल के कई हिस्सों में जलजमाव हो गया, जिससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला नहीं टूटा। सैकड़ों छात्र पूरी रात धरनास्थल पर डटे रहे और खराब मौसम के बीच भी आंदोलन जारी रखा।
छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। देर रात तक धरनास्थल पर छात्रों की मौजूदगी बनी रही और प्रशासन भी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए था।






