- Advertisement -
nashacm1nashacm1
- Advertisement -
nashacmaadnashacmaad
- Advertisement -
krishi vyapar mela 2026

सोशल मीडिया पेज पर जेएमएम ने कराई एफआईआर, हेमंत सोरेन की छवि ख़राब करने का आरोप

Picture of Live Dainik

Live Dainik

November 8, 2024

bjp Shadow adv

रांचीः सोशल मीडिया के जरिए समाज में गलत संदेश प्रसारित करने, धार्मिक उन्माद फैलाने और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की छवि को धूमिल करने वाले सोशल मीडिया पेज रांची चौपाल के ख़िलाफ प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी आवेदन गोंदा थाना में हेमलाल कुमार मेहता और रातू थाना में धर्मेंद्र कुमार सिंह द्वारा दिया गया है।

FIR में क्या आरोप  लगे?

आवेदन में कहा गया है कि “Ranchi Chaupal”, जो विशेष रूप से झारखंड के समाज, हेमंत सोरेन (मुख्यमंत्री झारखंड), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और झामुमो के उम्मीदवारों के खिलाफ सामाजिक रूप से अन्याय पूर्ण और विशिष्ट धूर्वीकरण अभियान चला रहा है। इन अनैतिक अभियानों का उद्देश्य धूर्वीकरण और अशांति फैलाकर झारखंड के समाज और मतदाताओं को गुमराह करना, झामुमो एवं झामुमो के नेताओं की छवि धूमिल करना और चुनावी प्रक्रिया को अनुचित रूप से प्रभावित करना है। उक्त आवेदनों को रिसीव कर पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।

आदेश और नियम की हो रही अनदेखी

एफआईआर में कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, सभी राजनीतिक विज्ञापनों को चुनाव आयोग द्वारा वेरिफाइड किया जाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त सभी प्रत्याशी के लिए चुनाव में किए जाने वाले खर्च की एक सीमा निर्धारित की गई है। साथ ही, छाया विज्ञापनदाताओं का जिनका राजनीतिक दलों से सीधे या परोक्ष रूप से संबंध है, इसमें दखल निषेध है। बावजूद इसके इन नियमों की अवहेलना की जा रही है। यह अवहेलना और कोई नहीं भाजपा जैसी राजनीतिक दल बड़े आराम से कर रहा है। भाजपा ने कैसे मेटा प्लेटफॉर्म का उपयोग कर झारखंड में सिर्फ तीन महीनों में राजनीतिक विज्ञापनों पर ₹2.25 करोड़ से अधिक खर्च किए। इसके जरिए भाजपा ने ना सिर्फ माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना नहीं की बल्कि मेटा प्लेटफॉर्म को राजनीतिक दुष्प्रचार का अड्डा बना दिया है।

See also  धनबाद के कृषि बाजार में फायरिंग, मारपीट कर अपराधियों ने व्यवसायी से की लूटपाट

 

डिजिटल विज्ञापन में खेल

यह रिपोर्ट दलित सॉलिडेरिटी फोरम, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडिया सिविल वॉच इंटरनेशनल, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और टेक जस्टिस लॉ प्रोजेक्ट द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है। रिपोर्ट की माने तो सिर्फ गूगल पर भाजपा ने इस दौरान ₹71.82 लाख का अतिरिक्त खर्च किया, जिससे उनका कुल आधिकारिक डिजिटल विज्ञापन खर्च ₹2.49 करोड़ हो गया। भाजपा के खर्च के विपरीत झारखंड कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित अन्य राजनीतिक दलों ने डिजिटल विज्ञापन में अपनी उपस्थिति काफी कम दिखाई है।

आदिवासी नेता पर निशाना साधा है

 

जांच रिपोर्ट में भाजपा के छाया विज्ञापनदाताओं के जटिल नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो चुनाव के नियमों और मेटा प्लेटफॉर्म की नीतियों का उल्लंघन करते हुए आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को निशाना बना रहा है। Jharkhand’s Shadow Politics: How Meta Permits, Profits From, and Promotes Shadow Political टाइटल से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि मेटा प्लेटफार्म पर भाजपा द्वारा चलाए गए छाया विज्ञापन अभियान ने आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की छवि को निशाना बनाया और सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा दिया। भाजपा के ऑफिशियल पेज के अतिरिक्त कई डमी पेजों के लिए लाखों रुपए खर्च कर भाजपा ने नारेटीव सेट किया, जिससे मेटा को अधिक पैसे की कमाई हुई है।

See also  महालक्ष्मी के 30 टुकड़े करके कहां छुपा है हत्यारा, नाई अशरफ से संबंध, पुलिस के हैरान करने वाले दावे

विभाजनकारी सामग्री पर किया खर्च

जारी रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा का ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज के बराबर ही इन डमी सोशल मीडिया पेज खर्च कर विभाजनकारी सामग्री परोसा गया।भाजपा के ऑफिशियल झारखण्ड पेज ने 3,080 विज्ञापनों के जरिए ₹97.09 लाख खर्च किए, जिससे 10 करोड़ इंप्रेशन इसे मिला। वहीं भाजपा से जुड़े करीब 87 डमी पेज की पहचान हुई है, जिसपर ₹81.03 लाख खर्च किए गए हैं। इनमें एक मिनट से भी कम समय के एनिमेटेड वीडियो पोस्ट किए गए, जिनमें सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी कंटेंट थे, जो चुनाव आयोग के नियमों के विरुद्ध हैं।

मेटा के मूल्यों पर सवालिया निशान

रिपोर्ट की माने तो, इस डिजिटल हेरफेर में मेटा की भूमिका भी कटघरे पर खड़ी नजर आती है। एक आम मेटा यूजर को कई वेरिफिकेशन के बाद एकाउंट बनाने की अनुमति मिलती हैं, जबकि राजनीतिक विज्ञापनदाताओं के लिए कड़े वेरिफिकेशन का दावा करने के बावजूद, मेटा प्लेटफॉर्म ने डमी विज्ञापनदाताओं से असत्यापित एड्रेस प्रूफ और नंबर कैसे स्वीकार कर लिए गए।

See also  पटना में लड़के और लड़की का शव रेलवे ट्रैक पर मिलने से सनसनी, ऑनर किलिंग का मामला

समुदाय विशेष और आदिवासी पहचान को किया टारगेट

रिपोर्ट के अनुसार, डमी सोशल मीडिया पेज के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आदिवासी पहचान और एक धर्म विशेष पर उनके रुख को टारगेट किया गया। यह कार्य पहले ही चल रहा था, लेकिन हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद इसमें तेजी देखी गई। दीपावली में कई सोशल मीडिया पेज के जरिए पेजों पर हेमंत सोरेन के सिर पर लाल सींगों के साथ तस्वीरें प्रसारित की गई। सामग्री में बार-बार मुस्लिम पुरुषों को नकारात्मक रूप से चित्रित किया गया लव जिहाद और बांग्लादेशी घुसपैठियों के संबंध में झूठी कहानियां प्रसारित की गई।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now