रांचीः राज्यसभा चुनाव में NDA और महागठबंधन के बीच शाह और मात का खेल जारी है। सोमवार को हुए एनडीए विधायक दल की बैठक में सात विधायकों के गैर-हाजिर होने के बाद अब विधायकों में टूट और क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है। राज्यसभा चुनाव में अपने वोट को सुरक्षित करने के लिए एनडीए के सभी विधायक रांची के रेडिसन ब्लू होटल में शिफ्ट हो रहे है। 18 जून को सभी एनडीए विधायक होटल से साथ-साथ विधानसभा पहुंचकर वोट डालेंगे। विपक्षी दलों में टूट की अटकलें लग रही हैं, इसलिए एनडीए ने यह एहतियाती कदम उठाया है।मंगलवार दोपहर से एनडीए विधायकों का होटल रेडिसन ब्लू में आने का सिलसिला शुरू हो गया।

कांग्रेस भी पूरी तरह सक्रिय
दूसरी ओर कांग्रेस भी पूरी तरह सक्रिय है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव समेत कई बड़े नेताओं को विधायकों से लगातार संपर्क बनाए रखने और मतदान की तैयारियों को सुचारू ढंग से चलाने का जिम्मा सौंपा गया है। विधायकों की कोई भी समस्या या सुझाव हो तो उसे पार्टी की उच्च कमान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।कांग्रेस को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के समर्थन के भरोसे अपनी जीत का विश्वास है। फिर भी पार्टी किसी भी लापरवाही से बचना चाहती है। इसलिए हर विधायक से निरंतर बातचीत जारी है।
जीत के लिए 28 वोटों की दरकार
NDA इस बार निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। आंकड़ों की बात करें तो राज्यसभा सीट पर प्रथम वरीयता की जीत दर्ज करने के लिए 28 वोटों की जरूरत है। वर्तमान में एनडीए खेमे के पास कुल 24 विधायक हैं। इसमें भाजपा के 21, आजसू, लोजपा और जदयू के एक-एक विधायक शामिल हैं। जीत के जादुई आंकड़े (28) तक पहुंचने के लिए एनडीए को अब भी चार अन्य वोटों की जुगाड़ करनी होगी। होटल में होने वाली इस बाड़ेबंदी और बैठक के दौरान इन्हीं बाकी बचे वोटों को साधने और रणनीति को अंतिम रूप देने पर गहन मंथन किया जाएगा।वहीं कांग्रेस और जेएमएम के विधायक मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर हो रहे रात्रि भोज में शामिल होंगे। बैद्यनाथ राम का जेएमएम के 34 में से 28 विधायकों का वोट मिलने के बाद चुनाव में जीत तय मानी जा रही है। प्रणव झा गठबंधन के अन्य बचे 28 वोटों के सहारे राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे है लेकिन नाथवानी के मैदान में आने से संशय की स्थिति बन गई थी लेकिन उन्होंने हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव के माध्यम से गठबंधन के विधायकों को साध लिया है, इसके साथ ही जयराम महतो को भी महागठबंधन के खेमे में लाने में वो कामयाब होते नजर आ रही है।







