पटना: 27 सितम्बर 2026। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, पटना कैंपस के साहित्यिक क्लब ने हिंदी पखवाड़ा 2026 का आयोजन बड़े उत्साह और उल्लास के साथ किया। “भाषा, भाव और संस्कृति का उत्सव” थीम पर आधारित यह कार्यक्रम संस्थान के सभागार में सम्पन्न हुआ, जिसमें संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों दोनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।


कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ :
✨ काव्यांजलि (स्वर में सजी कविता): विद्यार्थियों ने अपनी काव्य रचनाओं को स्वर और भाव के साथ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
✨ वक्तृत्व वैभव (शब्दों से विचारों तक): प्रतिभागियों ने अपने विचारों को आत्मविश्वास, स्पष्टता और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया।
✨ शायरी की महफ़िल (अल्फ़ाज़ों का अंदाज़): प्रतिभागियों ने शायरी के माध्यम से अपनी भावनाओं और कल्पनाशीलता को अभिव्यक्त किया।
✨ एकल रंगमंच (एक कलाकार, अनेक भाव): कलाकारों ने अपने एकल अभिनय के माध्यम से विभिन्न चरित्रों और भावों को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया।
✨ संकाय सदस्यों की सहभागिता: इस वर्ष कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि विद्यार्थियों के साथ साथ शिक्षकों ने भी मंच पर अपनी स्वरचित रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
✨ निदेशक महोदय का संबोधन: संस्थान के निदेशक डॉ. डी.के. मलिक ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
✨ पुरस्कार वितरण: विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। काव्यांजलि में मोहम्मद नदीम आलम प्रथम, राज पाठक द्वितीय तथा वैभव विकास तृतीय स्थान पर रहे। वक्तृत्व वैभव में सार्थक राउत प्रथम, शिखर सिन्हा द्वितीय तथा मोहम्मद नदीम आलम तृतीय स्थान पर रहे। शायरी की महफ़िल में कृष प्रथम, मोहम्मद नदीम आलम द्वितीय तथा प्रियांशु वत्स तृतीय स्थान पर रहे। एकल रंगमंच में वैभव सिंह प्रथम तथा मोहम्मद नदीम आलम द्वितीय स्थान पर रहे।
✨ आभार प्रदर्शन: कार्यक्रम का समापन इस आयोजन के समन्वयकों डॉ. के.पी. तिवारी एवं डॉ. आर.एस. पांडेय द्वारा संयुक्त रूप से दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस अवसर पर डॉ. के. शर्मा, डॉ. रत्नेश कुमार मिश्रा, डॉ. एस.के. सिन्हा, डॉ. पी.सी. श्रीवास्तव तथा श्री आनंद कुमार सिंह सहित कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे तथा उन्होंने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को हिंदी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति की समृद्धि पर विचार करने का अवसर दिया। हिंदी पखवाड़ा 2026 का यह आयोजन भाषा और संस्कृति के उत्सव को आगे बढ़ाने में एक यादगार पहल साबित हुआ।






