तीन-धनूष के साथ प्रचार कर रहे है हेमंत और कल्पना, मुख्यमंत्री ने कहा असम में आदिवासियों की स्थिति देखकर आती है शर्म

तीन-धनूष के साथ प्रचार कर रहे है हेमंत और कल्पना, मुख्यमंत्री ने कहा असम में आदिवासियों की स्थिति देखकर आती है शर्म

रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन असम विधानसभा चुनाव में जेएमएम प्रत्याशी के लिए वोट मांग रहे है। असम में बसे झारखंड के वो आदिवासी जो चाय बगानों में काम करते है उनकी दयनीय स्थिति देकर दोनों नेताओं ने चिंता और दुःख जताया है। हेमंत सोरेन ने असम की वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां आदिवासियों की स्थिति देखकर दया आती है। बिना घर और बिजली के ये यहां रह रहे है, यहां की अर्थव्यवस्थ और पहचान इन्हीं से है और इन्हें मात्र 250 रुपया मजदूरी मिलती है जिसे देखकर दया आती है। उन्होंने आगे हेमंता बिस्व सरमा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का सबसे चहेता मुख्यमंत्री यही का है और उसके बाद भी यहां आदिवासियों की ऐसी दयनीय स्थिति है।

 

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चाय बागान क्षेत्रों का दौरा करने के बाद अपनी चिंता व्यक्त करते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि इन सुदूरवर्ती इलाकों में आज भी बिजली, पक्की सड़क और प्रधानमंत्री आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। उन्होंने श्रमिक परिवारों की दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि लोगों ने अपनी समस्याओं और भविष्य की उम्मीदों को उनसे साझा किया है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जो लोग देश और दुनिया के लोगों के लिए चाय का उत्पादन करते हैं, उनके खुद के जीवन में विकास की रोशनी अब तक क्यों नहीं पहुंची?
हेमंत सोरेन ने किसान, मजदूर और आदिवासी समाज को एक मंच पर आने की सलाह देते हुए कहा कि एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे केवल चुनावी वादों और नारों के बहकावे में न आएं, बल्कि अपनी वर्तमान बदहाली और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर अपने मताधिकार का उपयोग करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जागरूक मतदाता का सही निर्णय ही व्यवस्था परिवर्तन का आधार बनता है, इसलिए समाज के हर वर्ग को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
अपने संबोधन के अंतिम चरण में, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने समाज में आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखने पर विशेष बल दिया।उन्होंने कहा कि विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा ‘विभाजन की राजनीति’ है, जो समुदायों को आपस में लड़ाकर असली मुद्दों से भटकाने का काम करती है। उन्होंने मतदाताओं को आगाह किया कि बेहतर भविष्य के लिए सभी समुदायों को मिलकर आगे बढ़ना होगा और ऐसी ताकतों को नकारना होगा जो विकास के बजाय द्वेष को बढ़ावा देती हैं। झामुमो के इस चुनावी अभियान ने असम के टी ट्राइब बेल्ट में राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।


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वहीं कल्पना सोरेन ने जेएमएम प्रत्याशी के लिए सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे आदिवासी भाई-बहन, जो पीढ़ियों से असम की इस धरती से जुड़े हैं…. हमारी आदिवासी माताएँ-बहनें, जिन्होंने अपने पसीने से असम की चाय अर्थव्यवस्था को सींचा है…आख़िर क्यों आज भी उन्हें वह सम्मान और अधिकार नहीं मिला, जिसके वे हक़दार हैं? यह एक सवाल नहीं, यह एक पीड़ा है, एक सच्चाई है, जिसे अब बदलना होगा।हम उनके इस संघर्ष में उनके साथ हैं और जब तक उन्हें उनका हक और सम्मान नहीं मिल जाता, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।जब जन्म से लेकर मरने तक, हमारे रहन-सहन में, व्यवहार में, पहनावे में और खान-पान में आदिवासियत बसती है…तो फिर असम के आदिवासी समाज को आज तक ST का दर्जा क्यों नहीं मिला?यह सवाल सिर्फ सवाल नहीं, यह हमारे अस्तित्व और सम्मान से जुड़ा हुआ है। JMM की सरकार बनते हीसबसे पहला कदम होगा, असम के आदिवासियों को ST का दर्जा दिलाना।यह हमारा वचन है। यह हमारा संकल्प है।

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