ट्रेजरी घोटाले की जांच CID से कराने का विरोध,बाबूलाल मरांडी ने CBI से जांच कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को लिख चिट्ठी

ट्रेजरी घोटाले की जांच CID से कराने का विरोध,बाबूलाल मरांडी ने CBI से जांच कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को लिख चिट्ठी

रांचीः झारखंड में हुए ट्रेजरी घोटाले पर सियासत अब गर्म हो रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसको लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिखी है और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि बहुचर्चित चारा घोटाले की तर्ज पर, पिछले कुछ दिनों से झारखंड पुलिस विभाग के ट्रेजरी से हो रही अवैध निकासी का मामला अब देश और प्रदेश में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।गौरतलब है कि इससे पहले भी ऊर्जा विभाग, पेयजल विभाग, पर्यटन विभाग सहित कई जिलों के ट्रेजरी से सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार के संरक्षण में ही सरकारी खजाने में सेंध लगाई जा रही है। इसी संदर्भ में माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की सीबीआई जांच अथवा न्यायिक जांच कराने का आग्रह किया गया है, ताकि दोषियों की निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आ सके।

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ट्रेजरी घोटाले को लेकर बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि ट्रेजरी घोटाले की जांच सीआईडी से कराने का हम विरोध करते है। उन्होंने कहा कि आप इस घोटोले की जांच सीआईडी से क्यों करा रहे है। हम जानते है कि जिले में जो डीडीओ होते है वो एएसपी स्तर के होते है, एएसपी नहीं होते है तो डीएसपी होते है। सीआईडी में कौन होते है वहीं डीएसपी वहीं इंस्पेक्टर। अब इन्हीं पुलिसकर्मियों से दूसरे पुलिसकर्मी की जांच करा रहे है। हम विरोध करते है इस मामले की सीबीआई से जांच कराया जाए और सीबीआई के साथ ईडी को मिलाया जाए। करोड़ों रुपए के घोटाले की बात आई है। अंतिम समय में जो घोटाले के आंकड़े आएंगे वो देश के बड़े बड़े घोटाले को पीछे छोड़ देंगे। अब राज्य सरकार को सीबीआई और ईडी को इसमें शामिल करना चाहिए क्योंक कई राज्यों से इसके तार जुड़े हुए है। खबर आ रही है कि जिसने पैसा लिया उसने दूसरे अकांउट में दूसरे राज्य में पैसा डाल दिया।

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प्रतुल शाहदेव ने आगे कहा कि 26 वर्षो में ऐसा कभी नहीं हुआ झारखंड में कि सैलरी का भुगतान जो कर्मचारियों-अधिकारियों को होता है आज 11 तारीख है लेकिन अब तक नहीं हुआ है। ये एक ऐसा रिकार्ड है जिसमें किसी भी सरकार को गर्व महसूस नहीं होगा। स्थिति इतनी गंभीर है कि राज्य सरकार के पेरोल पर 2 लाख 35 हजार 930 अधिकारी-कर्मचारी सैलरी पर ही निर्भर है। इसके अलावा 40-45 हजार संविदाकर्मी है जिनको भुगतान नहीं हुआ है। कर्मचारियों ने जो ईएमआई लिया है सब फेल कर रहा है। राज्य की अर्थव्यवस्था तो ध्वस्त हो ही चुका है अब कर्मचारियों के घरों की अर्थव्वस्था ध्वस्त होने के कगार पर है। जो सैलरी पर ही निर्भर रहता है उससे पूछकर देखिये 11 दिन बाद भी सैलरी नहीं मिले तो उसके परिवार का क्या होगा। यहां का वित्तीय प्रबंधन पूरे तरीके से बैठ गया है। सरकार कर्ज लेकर भी अधिकारियों और कर्मचारियों को पैसा नहीं दे पा रही है अब पानी सर से उपर चला गया है।

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