रांचीः डुमरी विधायक जयराम महतो के धनबाद के बरवाड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के साथ फोन पर गाली-गलौज का मामला तूल पकड़ने के बाद अब इसपर राजनीति शुरू हो गई है। जेएलकेएम अध्यक्ष जयराम महतो के समर्थन में कांग्रेस और बीजेपी खुलकर सामने आ गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर के बाद अब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी अब जयराम महतो के समर्थन में आ गए है। राजेश ठाकुर ने बोकारो में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि कई बार जनप्रतिनिधि के साथ ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि वो ऐसा व्यवहार कर देते थे। पुलिस-प्रशासन को भी जनप्रतिनिधियों की भावना का ख्याल रखना चाहिए। कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर के बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जयराम महतो का समर्थन किया है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा है कि विधानसभा सदस्य और थाना प्रभारी के बीच हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन से लेकर तरह-तरह के बयान सामने आ रहे हैं। अच्छी बात है कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा बनी रहनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?
क्या पुलिस एसोसिएशन ने उस गालीबाज दारोग़ा के व्यवहार पर कारवाई की बात तो दूर, कभी निंदा या आम आदमी के साथ गाली की भाषा में बात करने को लेकर कभी किसी पुलिस वाले को नसीहत दी? क्या पुलिस को यह पता नहीं है कि बिना किसी की सहमति के उससे बातचीत को रिकार्ड कर वायरल करना किसी की निजता के हनन का अपराधिक काम है? क्या यह निजता हनन का कानून सिर्फ आमलोगों के लिये ही बना है, पुलिस के लिये नही? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जबाब देना जरूरी है।
कुछ महीने पहले बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी का कथित गाली-गलौज वाला ऑडियो वायरल हुआ था। हमने सरकार से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग भी की थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे गालीबाज पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दिया।
थानों में आम जनता के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल, फोन पर गाली-गलौज और दुर्व्यवहार की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। आज अगर जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच ऐसी स्थिति पैदा हो रही है, तो इसके लिए राज्य सरकार की नीति और संरक्षण भी जिम्मेदार है।
अगर आम जनता द्वारा गाली देना अपराध है, तो पुलिस को ऐसा कौन-सा विशेषाधिकार मिला है कि वह जनता को अपशब्द कहे? यह विशेषाधिकार आखिर किसने दिया?
पुलिस को सबसे पहले जनता से बात करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा। सरकार को भी ऐसे मामलों में केवल निलंबन तक सीमित न रहकर कठोर कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज कराना सुनिश्चित करना चाहिए। तभी व्यवस्था में वास्तविक सुधार आएगा।

विधानसभा सदस्य और थाना प्रभारी के बीच हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन से लेकर तरह-तरह के बयान सामने आ रहे हैं। अच्छी बात है कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा बनी रहनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?
क्या पुलिस एसोसिएशन ने उस गालीबाज दारोग़ा… https://t.co/Dho40JwWzv
— Babulal Marandi (@yourBabulal) August 26, 2026




