रांचीः बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के सभी गेटों को बंद करने और उत्पादन पूरी तरह ठप करने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने बोकारो के उपायुक्त को तुरंत सभी गेट खुलवाने और कर्मचारियों की प्लांट में आवाजाही व काम पर जाना सुनिश्चित करने का कड़े निर्देश दिए।
गौरतलब हो कि बीएसएल में नौकरी की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ के बैनर तले 10 अक्टूबर से टू-टैंक गार्डन में आमरण अनशन जारी है। 15 अक्टूबर को आंदोलनकारियों ने प्लांट के गेट नंबर 9 और 10 को जबरन बंद कर दिया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को मुख्य गेट को छोड़कर बाकी सभी गेट बंद कर दिए गए थे।

इसके पश्चात बीएसएल प्रबंधन ने 17 अक्टूबर को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। प्रबंधन का कहना था कि उसके पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने अपनी रिट याचिका W.P.(Cr.) No. 639 of 2026 में झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, बोकारो के डीसी, एसपी, चास के एसडीओ, बोकारो विधायक श्वेता सिंह तथा विस्थापित अप्रेंटिस संघ को प्रतिवादी बनाया है।
रविवार, 18 अक्टूबर को बोकारो के डीसी अजय नाथ झा ऑनलाइन कोर्ट में उपस्थित हुए।सेल की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने पक्ष रखा। मामले में संचार प्रमुख देव कुमार धान ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद प्लांट के सभी गेट खुल गए हैं। गेट नंबर एक को सुबह ही खोल दिया गया था।
विधायक श्वेता सिंह अभी भी धरना स्थल पर डटी हुई हैं, हालांकि उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और ब्लड प्रेशर कम हो गया था।विधायक श्वेता सिंह ने कहा कि हम धरना पर डटे रहेंगे जब तक इनकी मांग पूरी नहीं होती।
झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष सुनवाई की। कोर्ट ने उपायुक्त को तत्काल सभी गेट खुलवाने और कर्मचारियों की आवाजाही सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया।इसके बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सभी गेट खुलवा दिए।
अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।इस दौरान सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। कोर्ट के आगामी फैसले पर बीएसएल और विस्थापितों के आंदोलन की आगे की दिशा टिकी हुई है।






