रांचीः माध्यमिक आचार्य परीक्षा में सफल 102 अभ्यर्थियों की डिग्री की जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनायी गयी है। कमेटी को 15 दिनों में जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। सभी अभ्यर्थियों ने राज्य के दो निजी विवि से स्नातकोत्तर और बीएड की डिग्री ली है। विभागीय स्तर पर हुई प्रारंभिक जांच में इन अभ्यर्थियों की डिग्री प्रथम दृष्टया संदेहास्पद मिली है। इसके बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसकी विस्तृत जांच के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखा था। विभाग ने अपर सचिव अंजलि यादव की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी गठित की है।
102 अभ्यर्थियों की डिग्री जांच के लिए बनी सात सदस्यीय कमेटी
सफल अभ्यर्थियों की डिग्रियों की जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी की अध्यक्षता विभाग की अपर सचिव अंजलि यादव, आईएएस करेंगी।वहीं, उप निदेशक अजय राज खलखो को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। कमेटी को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्रारंभिक जांच के बाद विस्तृत जांच के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखा था। इसके बाद विभाग ने जांच कमेटी गठित करने का निर्णय लिया।
विश्वविद्यालय जाकर मूल दस्तावेजों का होगा भौतिक सत्यापन
जांच कमेटी संबंधित दोनों निजी विश्वविद्यालयों का दौरा करेगी। वहां अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और मूल दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसमें एडमिट कार्ड, फीस रसीद, उपस्थिति पंजी, सेमेस्टरवार अंकपत्र और प्रैक्टिकल कॉपी समेत सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच होगी। समिति में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रतिनिधि, विधि विभाग के प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी तथा रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पीजी में 65 से 70 फ़ीसदी अंक पाने वाले 93 अभ्यर्थी
डिग्रियों की जांच का निर्णय लेने के पीछे कई अहम तथ्य सामने आए हैं। दोनों निजी विश्वविद्यालयों से पीजी करने वाले 93 सफल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक 65 से 70 फ़ीसदी के बीच हैं।खोरठा विषय में सफल नौ अभ्यर्थियों में से छह एक ही विश्वविद्यालय के हैं। इन सभी के अंक 67 से 68 फ़ीसदी के बीच हैं। वहीं, पीजी राजनीति शास्त्र के 14 सफल अभ्यर्थियों में नौ को 67 से 68 फ़ीसदी अंक मिले हैं। गृह विज्ञान विषय में भी इसी तरह का पैटर्न सामने आया है। इस विषय के 13 सफल अभ्यर्थियों में सात के प्राप्तांक 66 से 67 फ़ीसदी के बीच हैं।
10 साल बाद पीजी, कई अभ्यर्थियों की पढ़ाई में लंबा अंतराल
जांच के दौरान अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े कई अन्य तथ्य भी सामने आए हैं। 11 अभ्यर्थियों ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के 10 वर्ष या उससे अधिक समय बाद पीजी की डिग्री हासिल की है। वहीं, 20 से अधिक अभ्यर्थियों के स्नातक और पीजी की पढ़ाई के बीच आठ से नौ वर्ष का अंतर पाया गया है।इन तथ्यों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ही 24 अभ्यर्थियों ने किया पीजी
आंकड़ों के मुताबिक, 24 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति वर्ष 2025 में ही पीजी की परीक्षा पास की थी। वहीं, 25 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने से एक वर्ष पहले पीजी की डिग्री हासिल की थी। इसके अलावा 17 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति वर्ष में ही निजी विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री प्राप्त की। इन सभी तथ्यों की कमेटी विस्तृत जांच करेगी।
1373 पदों के लिए हुई थी परीक्षा, 877 पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से माध्यमिक आचार्य के 1373 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद 877 पदों पर नियुक्ति के लिए शिक्षा विभाग से अनुशंसा की गई थी। अब सफल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के बाद नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में 102 अभ्यर्थियों की डिग्री जांच की रिपोर्ट पर सभी की नज़रें टिकी हैं।
इसलिए जांच का लिया गया निर्णय
दोनों विवि से पीजी करने वाले 93 सफल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक 65 से 70% के बीच हैं।
खोरठा विषय में सफल नौ में छह अभ्यर्थी एक विवि के है, सबके अंक 67 से 68% के बीच हैं।
पीजी राजनीति शास्त्र के 14 सफल अभ्यर्थियों में नौ को 67 से 68% अंक मिले हैं।
गृह विज्ञान विषय में 13 सफल अभ्यर्थियों में सात के प्राप्तांक 66 से 67% के बीच हैं।
11 अभ्यर्थियों ने स्नातक के 10 वर्ष या उससे अधिक समय बाद पीजी की डिग्री हासिल की।
20 से अधिक अभ्यर्थियों के स्नातक व पीजी की पढ़ाई में आठ से नौ वर्ष का अंतर है।
24 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति वर्ष 2025 में पीजी की परीक्षा पास की।
25 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने से एक वर्ष पहले पीजी किया।
17 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति वर्ष में ही निजी विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री हासिल की।







