गिरिडीहः पारसनाथ में मारांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन के समापन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, घाटशिला विधायक सोमेशचंद्र सोरेन समेत आदिवासी समाज के कई प्रतिनिधि शामिल हुए। झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आए सभी अगुआ नेताओं को संबोधित करते हुए हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मेरे जीते जी मारांग बुरु को कोई मिटा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि मारांग बुरू हमारी आस्था और पहचान के प्रतीक हैं। हमें इन्हें बचाना है। इसके लिए हम सभी को एकजुट होकर खड़ा होना होगा। जब हम साथ रहेंगे, तो हमारी ताकत इतनी बड़ी होगी कि विरोधी हमारी गिनती भी नहीं कर पाएंगे।’
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमें इतिहास से सीखना होगा। महाजनी प्रथा ने किस तरह हमारे समाज को शोषण और कर्ज के जाल में फंसाकर बर्बाद किया था, यह हम सभी जानते हैं।
आज अगर हम एकजुट नहीं रहेंगे, अपने समाज को मजबूत नहीं करेंगे, तो फिर से उसी तरह की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। हमारी जमीन, हमारे अधिकार और हमारा भविष्य खतरे में पड़ सकता है।इसलिए हमें जागरूक रहना होगा। अपने संवैधानिक अधिकारों को समझना है। पांचवीं और छठी अनुसूची सहित संविधान में मिले संरक्षण को जानना और उसकी रक्षा करना है।
सभी समाजों का सम्मान करते हुए आदिवासी समाज को भी अपनी पहचान, अधिकार और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ना है। याद रखिए, जब तक हम एकजुट हैं, हमारी ताकत को कोई कमजोर नहीं कर सकता।
उन्होंने आगे कहा कि हम आदिवासी इस धरती के सबसे प्राचीन लोगों में से हैं। हमारी पहचान, हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारी पूजा-पद्धति प्रकृति से जुड़ी हुई है।
आज कुछ लोग हमारी पहचान को दूसरे धर्मों के चश्मे से देखने की कोशिश करते हैं। लेकिन हमें अपनी जड़ों को समझना होगा। हमारा धर्म और जीवन-दर्शन प्रकृति के साथ साझा अस्तित्व और उसके सम्मान पर आधारित है।
हमारे आराध्य किसी मनुष्य की आकृति तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने इस सृष्टि की रचना की है। धरती, जंगल, पहाड़, नदियां और समस्त जीव-जगत उसी सृष्टि का हिस्सा हैं।
हमें अपनी इस पहचान, परंपरा और प्रकृति से जुड़े जीवन-दर्शन पर गर्व होना चाहिए। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी इस विरासत से परिचित कराना होगा। हमारा संकल्प स्पष्ट है, हमें मारांग बुरू, अपनी संस्कृति और अपनी पहचान को बचाना है।






