डेस्कः झारखंड में नक्सवाद के सबसे बड़े चेहरों में गिने जाने वाले आकाश उर्फ असीम मंडल ने सरेंडर कर दिया है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद वो झारखंड में माओवाद का सबसे बड़ा चेहरा था। प्रतिबंधित माओवादी संगठन के सेंट्रल कमेटी सदस्य असीम मंडल ने पश्चिम बंगाल में आत्समर्पण करने की खबर सामने आई है। उसे आत्मसमर्पण के बाद झारखंड में नक्सलवाद का अंत हो गया है क्योंकि वो झारखंड-ओडिशा-पश्चिम बंगाल में माओवाद का सबसे बड़ा चेहरा था जिसकी न तो गिरफ्तारी हुई थी और न ही सरेंडर ही किया था। उसके आत्मसमर्पण के बाद अब झारखंड को एक तरीके से नक्सल मुक्त कहा जा सकता है। असीम मंडल के ऊपर झारखंड और ओडिशा सरकार की ओर से कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. इसमें झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ और ओडिशा सरकार की ओर से 1.20 करोड़ रुपये का इनाम शामिल है।
झारखंड पुलिस मुख्यालय के द्वारा असीम मंडल के बंगाल में आत्मसमर्पण करने की पुष्टि की गई है।झारखंड में उसके खिलाफ करीब 55 मामलों में वांछित होने की जानकारी सामने आई है।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना क्षेत्र के उत्तर फूलचुक निवासी असीम मंडल का माओवादी सफर काफी पुराना बताया जाता है। 1980 के दशक में कॉलेज के दिनों से वाम उग्रवादी आंदोलन से जुड़ने के बाद वह धीरे-धीरे भूमिगत गतिविधियों का हिस्सा बन गया। बाद में भाकपा (माओवादी) में उसकी भूमिका लगातार बढ़ती गई।
2011 में माओवादी नेता किशनजी की मौत के बाद पश्चिम बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी असीम मंडल को मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद वह सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में संगठन के महत्वपूर्ण चेहरों में बना रहा।

असीम मंडल का नाम झारखंड में हुई कई माओवादी घटनाओं से जुड़ा रहा है। 1 मार्च 2026 को छोटानागरा थाना क्षेत्र के मरांगपोंगा में 209 कोबरा के एक असिस्टेंट कमांडेंट समेत दो सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की घटना में भी उसका नाम सामने आया।
इसके अलावा 12 अप्रैल 2025 के जाराईकेला क्षेत्र के राधापोरा, 11 जनवरी 2023 के टोंटो क्षेत्र के तुम्बाहाका, 31 मई 2020 के कराईकेला क्षेत्र के जोंवा और 11 जुलाई 2018 के पूर्वी सिंहभूम के झाटी पहाड़ी क्षेत्र से जुड़े मामलों में भी असीम मंडल का नाम सामने आया है।
सरेंडर के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने असीम मंडल से पूछताछ शुरू कर दी है। माओवादी नेटवर्क, संपर्क सूत्रों, संभावित हथियार एवं गोला-बारूद के डंप, भूमिगत ठिकानों और संगठन की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए असीम मंडल की पूछताछ इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय तक संगठन के शीर्ष स्तर पर सक्रिय रहने के कारण उसे माओवादी नेटवर्क की अंदरूनी संरचना की जानकारी है।
सरेंडर से बदली जंगल की तस्वीर
असीम मंडल का आत्मसमर्पण झारखंड में माओवादी विरोधी अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। संगठन के पुराने और इनामी चेहरों के लगातार कमजोर पड़ने से जंगलों में माओवादी गतिविधियों की तस्वीर बदली है। असीम मंडल के बाद झारखंड में नक्सलियों का कोई चेहरा नहीं बचा।



