रांचीः झारखंड राज्य कृषि विपणन पर्षद (मार्केटिंग बोर्ड) के अध्यक्ष रवींद्र सिंह पर तबादले के नाम पर पैसे वसूलने का आरोप लगा है। सह आरोप बोर्ड के ही कुछ अधिकारियों ने लगाया है। उन्होंने विभागीय मंत्री के नाम पर पत्र लिखा है। इसके बाद मंत्री के आदेश से तबादला प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी है। मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक को भी इसकी सूचना दी गयी है। विभाग ने लगे आरोपों की जांच का आदेश दिया है। इसके लिए कमेटी बनाने के लिए कहा गया है।
आरोप है कि पर्षद के अध्यक्ष रवींद्र सिंह द्वारा विभिन्न बाजार समितियों में कार्यरत पणन सचिवों, बाजार पर्यवेक्षकों और पत्राचार लिपिकों का स्थानांतरण और पदस्थापन किया जा रहा है। लाखों रुपये लेकर चहेतों को उनकी मनपसंद स्थान पर ट्रांसफर करने की योजना बनायी गयी है। 2024 में सभी कर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की गयी थी, जिसका अभी तक दो साल भी नहीं हुआ है। इसके बाद राज्य की विभिन्न बाजार समितियों में कार्यरत वैसे कर्मी, जो अध्यक्ष के गलत कार्यो का नीतिगत विरोध कर रहे हैं, उनको दूरस्थ जिलों में भेजने की तैयारी की गयी है, जिन आरोपी पणन सचिवों पर पूर्व के प्रबंध निदेशक ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है, उनकी निलंबन वापसी का दवाब बनाया जा रहा है।
शिकायत पत्र के आधार पर रोक लगाने का आग्रहः शिकायत पत्र मिलने के बाद मंत्री के आप्त सचिव मनोरंजन कुमार ने तबादला प्रक्रिया पर रोक का आग्रह विभागीय सचिव से किया। उन्होंने लिखा कि पत्र के अनुसार पर्षद में स्थानांतरण-पदस्थापन की प्रक्रिया में अनियमितता, अवैध वित्तीय लेन-देन का आरोप लगा है। यह अत्यंत गंभीर विषय है। इसके बाद कृषि विभाग ने तबादला प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। विभाग के उपसचिव विभाष चंद सिंह ने प्रबंध निदेशक को जानकारी दी है कि आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाने की प्रक्रिया जारी है।
आरोप लगानेवाले शपथ पत्र के साथ दें जानकारी
इन आरोपों पर मार्केटिंग बोर्ड के अध्यक्ष रवींद सिंह ने कहा है कि मार्केटिंग बोर्ड स्वाययशासी संस्था है, इसमें सरकार का बहुत हस्तेक्षेप नहीं होना चाहिए। जिन कर्मियों और अधिकारियों ने यह आरोप लगाया है, उनको साक्ष्य के साथ शपथपत्र से पर्षद को जानकारी देनी चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करते है, तो उनको चिन्ह्रित कर उनके खिलाफ विभागीय के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी। इस पर सरकार के साथ-साथ संगठन से भी बात की जायेगी।







