डेस्कः शुक्रवार को बीजेपी ने एक ओर बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपने उम्मीदवार को बदल दिया तो दूसरी ओर मध्यप्रदेश के दतिया में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाने का एलान किया। मध्यप्रदेश में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद हंगामा शुरू हो गया है भारी बवाल हुआ। हाईवे स्थित भाजपा जिला कार्यालय पर पूर्व गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा समर्थक काफी संख्या में जमा हो गए। उन्होंने हाईवे पर बैठकर धरना दिया। जमकर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए।
सबसे ज्यादा नाराजगी उन भाजपा नेताओं में देखने को मिली, जिन्हें डॉ मिश्रा को टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन भाजपा आलाकमान ने उन्हें दरकिनार कर मप्र हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया, जिसके बाद शुक्रवार शाम को दतिया में भाजपा का घमासान सड़कों पर आ गया। बवाल के बीच सबसे बड़ा झटका संगठन को लगा है। भाजपा के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को अपना सामूहिक इस्तीफा भेज दिया है। पत्र में साफ तौर पर केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को ‘एकतरफा’ और कार्यकर्ताओं का अपमान बताया गया है।
कुशवाह ने पत्र में लिखा है, ”मैं रघुवीरसिंह कुशवाह जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी दतिया अपने समस्त कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से बातचीत करने के बाद निर्णय लेता हूं कि पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा में होने जा रहे उपचुनाव में लिया गया निर्णय एकतरफा एवं पार्टी के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते हुये दिया गया है।

मैं अपने समस्त पदाधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, ,दतिया विधानसभा के 6 मण्डलों के अध्यक्ष, मोर्चा अध्यक्ष, दतिया, बड़ौनी के समस्त पार्षदगण तथा दतिया विधानसभा की 281 बूथों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सहित सामूहिक रूप से दायित्वों से इस्तीफा देते हैं। पार्टी 24 घण्टे में प्रत्याशी डॉ.नरोत्तम मिश्रा जी को नहीं बनाती है तो पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देंगे. पूरी ताकत से विरोध करेंगे।”
त्रिकोणीय दंगल में फंसी भाजपा, नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर नजर
बता दें कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को करीब 7000 वोटों से हराकर भाजपा के इस अभेद्य किले को ढहा दिया था। पार्टी हाईकमान ने इसी हार के फीडबैक और आंतरिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इस बार चेहरा बदलने का कड़ा कदम उठाया है।
राजेंद्र भारती के अयोग्य होने से सीट खाली
यह सीट धोखाधड़ी के एक मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता के लिए उनके अयोग्य होने से खाली हुई है।दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को धोखाधड़ी के उस मामले में भारती की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें 1998 और 2011 के बीच गैर-कानूनी तरीके से ब्याज का भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया था। भारती की सजा पर रोक लगाने की याचिका पर फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति मनोज जैन ने कहा, ‘‘हम इसे खारिज कर रहे हैं।’’ निचली अदालत ने दो अप्रैल को, जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व अध्यक्ष भारती को इस मामले में तीन साल की कैद की सजा सुनाई थी। यह मामला मध्य प्रदेश के दतिया से संबंधित है। मामले को पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था, क्योंकि बचाव पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने के प्रयास किये जाने का दावा किया गया था।


