पटनाः मुजफ्फरपुर के साहेबगंज से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री राजू कुमार सिंह को 31 दिसंबर 2018 की न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए 4 साल जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने मृतका के पति को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।इस फैसले के साथ ही राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता भी तकनीकी और कानूनी रूप से समाप्त हो गई है। ऐसे में हर किसी के जेहन में यह सवाल है कि उनकी सदस्यता किस कानून के तहत गई है?साहेबगंज सीट कब से खाली मानी जाएगी और अब आगे की कानूनी व चुनावी प्रक्रिया क्या होगी? आइए इन सभी तकनीकी पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।
#WATCH दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के विधायक राजू कुमार सिंह को 31 दिसंबर, 2018 को नए साल की पार्टी के जश्न के दौरान की गई फायरिंग से हुई मौत के मामले में 4 साल की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने मृतक महिला के पति को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया है। pic.twitter.com/Y5pf8r9cOE
— Live Dainik (@Live_Dainik) July 4, 2026
तत्काल प्रभाव से खाली हुई साहेबगंज सीट
अदालती फैसला आते ही साहेबगंज विधानसभा सीट उसी तिथि यानी 04 जुलाई 2026 से खाली मानी जाएगी। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, जैसे ही अदालत का अंतिम फैसला आता है, संबंधित विधायक की सदस्यता उसी क्षण (तत्काल प्रभाव) से समाप्त हो जाती है। विधानसभा के रिकॉर्ड में भी सीट खाली होने की प्रभावी तारीख सजा सुनाए जाने का दिन ही दर्ज की जाती है।
इस कड़े कानून के तहत गई विधायकी
राजू सिंह की सदस्यता 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act, 1951) की धारा 8(3) के तहत गई है। इस कानून के निम्न प्रावधान हैं:
यदि किसी भी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो वह दोषी ठहराए जाने की तारीख से ही सदन का सदस्य होने के लिए अयोग्य हो जाता है।
चुनावी प्रतिबंध: इस कानून के तहत राजू सिंह न केवल वर्तमान में अयोग्य हुए हैं, बल्कि वह अपनी 4 साल की सजा काटने के बाद भी अगले 6 वर्षों तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यानी उनके चुनावी करियर पर एक लंबा ब्रेक लग गया है।
'लिली थॉमस' फैसले से बदला नियम
अक्सर यह भ्रम रहता है कि कोर्ट से सजा मिलने के बाद ऊपरी अदालत में अपील के लिए कुछ दिनों का समय मिलता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सदस्यता जाने में अब एक भी दिन का वक्त नहीं लगता।दरअसल, पहले कानून में सजा के बाद अपील के लिए 3 महीने की मोहलत मिलती था।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में 'लिली थॉमस बनाम भारत संघ' के ऐतिहासिक मामले में फैसला सुनाते हुए इस रियायत को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा आदेशानुसार, निचली अदालत द्वारा सजा घोषित होते ही सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है।
क्या है विधानसभा सचिवालय की प्रक्रिया
राजू सिंह की सदस्यता खत्म होने के बाद अब प्रशासनिक और विधायी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है:
कोर्ट ऑर्डर की प्रति: सबसे पहले नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले और सजा के आदेश की प्रमाणित कॉपी आधिकारिक तौर पर बिहार विधानसभा सचिवालय को भेजी जाएगी।
अधिसूचना : कोर्ट ऑर्डर की कॉपी मिलते ही बिहार विधानसभा सचिवालय त्वरित कार्रवाई करता है। आमतौर पर आदेश मिलने के 2 से 7 दिनों के भीतर सचिवालय की ओर से राजू सिंह की सदस्यता समाप्त करने और साहेबगंज सीट को 'रिक्त' (Vacant) घोषित करने का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।
चुनाव आयोग को रिपोर्ट: विधानसभा सचिवालय इस अधिसूचना की एक प्रति तुरंत भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) को भेजता है, ताकि वहां अगली प्रक्रिया शुरू हो सके।
साहेबगंज में उपचुनाव की तैयारी
साहेबगंज विधानसभा सीट खाली होने के बाद अब वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए निर्वाचन आयोग कदम उठाएगा।
6 महीने में चुनाव अनिवार्य: नियमानुसार, यदि किसी विधानसभा सीट के सामान्य कार्यकाल में 1 वर्ष से अधिक का समय बचा हो, तो सीट रिक्त होने की तिथि से अगले 6 महीने के भीतर वहां उपचुनाव (By-Election) कराना अनिवार्य होता है।
प्रशासन के हाथ में कमान: चुनाव आयोग जल्द ही साहेबगंज क्षेत्र में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा। जब तक नया जनप्रतिनिधि नहीं चुन लिया जाता, तब तक इस क्षेत्र में विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था की सीधी जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासन और राज्य सरकार की देखरेख में रहेगी।


