पूर्वी सिंहभूम के पोटका में ब्रेन मेलेरिया के 6 और मरीज मिले, आंकड़ा 15 के पार, दो दिन में तीन की मौत

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June 28, 2026

पूर्वी सिंहभूम के पोटका में ब्रेन मेलेरिया के 6 और मरीज मिले, आंकड़ा 15 के पार, दो दिन में तीन की मौत

पूर्वी सिंहभूमः एमजीएम अस्पताल में ब्रेन मलेरिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस समय अस्पताल के शिशू रोग विभाग में पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले में विभिन्न प्रखंडों से आये 15 मासूम बच्चे जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे है। इन सभी बच्चों में ब्रेन मलेरिया की पुष्टि हो चुकी है। पोटका में ब्रेन मलेरिया से तीन की मौत के बाद आखिरकार राज्य की स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आई और शनिवार को मलेरिया विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। जांच के दौरान छह और संक्रमित लोगों की पुष्टि हुई, जिससे संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 15 के पार हो गई है। सभी मरीजों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका, एमजीएम अस्पताल, सदर अस्पताल और निजी अस्पताल में चल रहा है। निशा सरदार, लक्ष्मी टुडू, प्रियंका महाकुड़, एम. सबर, मिंकी सबर, सुकुरमनी भूमिज, दिलीप भूमिज, संप्रिया सिंह, हिंदी सरदार, कापरा टुडू, प्रिया सरदार, कार्तिक सिंह, अजीत भूमिज, कालीपदो हांसदा सहित एक अन्य मरीज का उपचार चल रहा है।
राज्य स्तरीय वीबीडी (वेक्टर बॉर्न डिजीज) कंसल्टेंट विनय कुमार, राज्य मलेरिया विभाग के जयंत कुमार, अनील कुमार और जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉक्टर मृत्युंजय धाउड़िया ने केजीबीवी विद्यालय, सानग्राम कांदर और अन्य प्रभावित गांवों का दौरा किया। टीम ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर घटनाक्रम की , जानकारी ली और ग्रामीणों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव रोकने और बुखार होने पर तत्काल जांच कराने की सलाह दी।
विधायक की अध्यक्षता में हाई-लेवल बैठक
दौरे के तुरंत बाद सीएचसी पोटका में स्थानीय विधायक संजीव सरदार की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें जमीनी स्तर पर संसाधनों और दवाओं की भारी कमी का खुलासा हुआ:
स्प्रे पंप का टोटा: पूरे प्रखंड के प्रभावित गांवों में इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) छिड़काव के लिए मात्र 2 पंप उपलब्ध हैं, जिससे काम ठप पड़ा था।
कर्मियों की कमी: मलेरिया जांच के लिए पूरे क्षेत्र में केवल 5 एमपीडब्ल्यू (MPW) कर्मी ही कार्यरत हैं।
दवाओं का संकट: आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता बेहद सीमित पाई गई।
तत्काल भेजे जाएंगे संसाधन : टीम
बैठक में राज्य स्तरीय टीम ने इन कमियों को तत्काल दूर करने के लिए निर्देश जारी किए। टीम ने 4 अतिरिक्त स्प्रे पंप तुरंत मुहैया कराने और जरूरत पड़ने पर राज्य मुख्यालय से 50 और पंप भेजने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाने के लिए 3600 मलेरिया जांच किट तुरंत उपलब्ध कराई जा रही हैं। दवाओं की कमी न हो, इसके लिए सीएचसी स्तर पर स्थानीय स्तर से सीधे दवा खरीदने की छूट दी गई है।प्रतिदिन मलेरिया की स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद स्वाथ्यविभाग का अमला सक्रिय हो गया है।
मेला बना संक्रमण की वजह!
अधिकारियों ने केजीबीवी पोटका, सानग्राम और कांदर गांव के निरीक्षण के दौरान पाया कि हाल ही में संपन्न हुए हरिणा मेला के बाद से इस क्षेत्र में मलेरिया का संक्रमण तेजी से फैला है। हरिणा, ढेंगाम, उदाल और कोवाली को पहले भी मलेरिया जोन के रूप में चिह्नित किया गया था। समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि पूर्व में होने वाले डीडीटी छिड़काव के बंद होने के बाद से इलाके में मच्छरों का प्रकोप और संक्रमण बढ़ा है।स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को पानी जमा न होने देने, अनिवार्य रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने और हल्का बुखार होने पर भी तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच कराने की सख्त सलाह दी है।

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