रांचीः झारखंड राज्य सूचना आयाेग में वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के प्रवक्ता रहे तनुज खत्री, भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक तथा कांग्रेस नेता अमूल नीरज खलखो सूचना आयुक्त होंगे। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सूचना आयुक्त के पद पर इन चारों की नियुक्ति के संबंध में राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर सशर्त स्वीकृति प्रदान की है।उन्होंने कहा है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में यदि कोई प्रक्रियागत त्रुटि पाई जाती है अथवा इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से संबंधित कोई सवाल उठता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।
राज्यपाल ने राज्य सरकार को निर्देश भी दिया है कि आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोग का कार्य सुचारु एवं प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है। अब राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद कार्मिक विभाग चारों सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधित अधिसूचना जारी करेगा।
बताते चलें कि राज्यपाल ने पूर्व में अनुज सिन्हा को छोड़कर बाकी अन्य तीन नामों पर आपत्ति करते हुए प्रस्ताव लौटा दिया था। उन्होंने तीनों के राजनीतिक दलों से जुड़े होने पर सवाल उठाया था कि उनकी नियुक्ति सूचना आयुक्त के पद पर हो सकती है या नहीं। साथ ही उनपर आपराधिक मामलों की भी जानकारी मांगी थी।
छह वर्षों से रिक्त है सूचना आयुक्तों के पद
झारखंड राज्य सूचना आयोग में पिछले लगभग छह वर्ष से मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के पद रिक्त हैं। इस कारण यहां पूरी तरह सुनवाई ठप है। बताया जाता है कि लगभग 25 हजार आवेदन वहां लंबित हैं। इस मसले पर झारखंड हाई कोर्ट में लगातार सुनवाई से जल्द नियुक्ति का दबाव राज्य सरकार बना हुआ था।
इन चार नामों पर लगी मुहर
राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किए गए प्रस्ताव के अनुसार, राज्य सूचना आयोग में जिन चार प्रमुख चेहरों को सूचना आयुक्त बनाया गया है, वे हैं:
अनुज कुमार सिन्हा: वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और झारखंड के बौद्धिक व सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ रखने वाली शख्सियत।
तनुज खत्री: युवा और प्रखर राजनीतिज्ञ/अधिवक्ता, जो विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मंचों पर सक्रिय रहे हैं।
अमूल्य नीरज खलखो: प्रशासनिक व सामाजिक क्षेत्र का जाना-माना चेहरा।
शिवपूजन पाठक: सार्वजनिक जीवन और सांगठनिक कार्यों का लंबा अनुभव रखने वाले वरिष्ठ व्यक्तित्व।
क्यों अहम है यह फैसला?
लंबे समय से लंबित था मामला: झारखंड राज्य सूचना आयोग पिछले काफी समय से आयुक्तों के पदों की रिक्ति के कारण लगभग निष्क्रिय सा हो गया था। आयुक्तों के न होने से आरटीआई के तहत आने वाली हजारों द्वितीय अपीलों का निपटारा रुका हुआ था और मामलों का अंबार लग गया था।
पारदर्शिता को मिलेगा बल: इन चार नई नियुक्तियों के बाद राज्य में सूचना के अधिकार कानून के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। आम जनता को विभागों से समय पर जानकारी न मिलने की स्थिति में अब समय पर न्याय मिल सकेगा।
संतुलित चयन: इस सूची में पत्रकारिता, कानून, प्रशासन और सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि के दिग्गजों को शामिल कर एक संतुलित पैनल बनाने का प्रयास किया गया है, ताकि आयोग का कामकाज पारदर्शी और प्रभावी तरीके से चल सके।
राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा जल्द ही इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत इन सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण के दिन से ही इनका कार्यकाल शुरू हो जाएगा, जिससे राज्य में पारदर्शिता और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।


