पश्चिमी सिंहभूम: चाईबासा स्थित कोषागार से पुलिस विभाग के खाते से लाखों रुपये की गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।इस मामले में मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज करते हुए पुलिस ने एक सिपाही को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने फर्जी बिल, नकली दस्तावेज और जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर किस्तों में करीब 45 लाख रुपये की अवैध निकासी की है। मुख्य आरोपी सिपाही देव नारायण मुर्मू पर आरोप है कि उसने निकाली गई राशि का कुछ हिस्सा अपने परिजनों के बैंक खातों में भी ट्रांसफर किया। जांच के दौरान कोषागार से जुड़े दो अन्य कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिससे मिलीभगत की आशंका उजागर हुई है।
ऑडिट के दौरान खातों के मिलान में अनियमितता
बताया जा रहा है कि नियमित ऑडिट के दौरान खातों के मिलान में अनियमितता सामने आई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसकी सूचना उपायुक्त और एसपी को दे दी गई है, जिसके बाद विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की गई। करीब तीन दिनों तक चली जांच के बाद पुलिस ने पूरे मामले की परतें खोल दी।
राशि की बरामदगी के लिए प्रयास तेज
एसपी ने बताया कि एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि अन्य की तलाश जारी है। साथ ही निकाली गई राशि की बरामदगी के लिए भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं।पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घोटाले में और कौन-कौन शामिल हैं तथा रकम किन-किन खातों में भेजी गई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि झारखंड में इससे पहले भी अन्य जिलों में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं।अब चाईबासा में इस तरह की घटना उजागर होने से वित्तीय निगरानी और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।


