हजारीबाग वन भूमि घोटाला, ACB ने 13 सरकारी गवाह बनाए, कहा- विनय चौबे ने विनय सिंह की पत्नी के नाम जमाबंदी के लिए दवाब बनाया

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February 15, 2026

हजारीबाग वन भूमि घोटाला, ACB ने 13 सरकारी गवाह बनाए, कहा- विनय चौबे ने विनय सिंह की पत्नी के नाम जमाबंदी के लिए दवाब बनाया

रांचीः हजारीबाग वन भूमि घोटाले में एसीबी ने विशेष अदालत में 14 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें जांच एजेंसी ने 13 गवाहों की सूची भी सौंपी है। जिसमें तत्कालीन अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मी, एसीबी के डीएसपी समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं।

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चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि हजारीबाग डीसी रहने के दौरान विनय चौबे ने विनय सिंह की पत्नी के नाम खरीदी गई वन भूमि की जमाबंदी के लिए अधीनस्थ अधिकारियों पर दवाब बनाया। विनय चौबे वहां वर्ष 2010 से 2013 तक उपायुक्त रहे थे। वन भूमि की खरीद विनय चौबे के सहयोगी विनय सिंह व उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर हुई थीएसीबी का दावा है कि विनय चौबे और विनय सिंह के बीच व्यावसायिक संबंध रहे है। एसीबी ने चौके की पत्नी स्वप्ना संचिता, उनके साले शिपिज त्रिवेदी व अन्य पारिवारिक सदस्यों और विनय सिंह की कंपनी के बीच करोड़ों रुपए के लेनदेन के दस्तावेज भी जमा किए गए है। एसीबी ने उक्त लेन-देन के सबूत को भी जमा किया है। जिसमें विनय चौबे और उनके परिवार के साथ विनय सिंह की कंपनी के बीच 50 से अधिक बैंकिंग लेन-देन हुए हैं।

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पांच प्लाटों की अवैध तरीके से हुई थी जमाबंदी
चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि चौबे के कार्यकाल के दौरान वन विभाग की भूमि के पांच प्लाटों की अवैध तरीके से जमाबंदी हुई थी। यह जमीन गैरमजरूआ खास जंगल झाड़ी से रूप में दर्ज थी।वन संरक्षण अधिनियम के अनुसार भारत सरकार की अनुमति के बिना ऐसी भूमि का उपयोग गैर वानिकी कार्यो के लिए नहीं किया जा सकता था।आपसी मिलीभगत से आरोपितों ने जमीन का मालिकाना हक बदलकर पूरा खेल किया। मामला सामने आने के बाद वर्ष 2013 में ही सभी अवैध जमाबंदियों को रद किया गया था।एसीबी ने प्रारंभिक जांच में पुष्टि होने के बाद 25 सितंबर 2025 को सरकार से अनुमति प्राप्त की और एसीबी हजारीबाग थाना कांड संख्या 11/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

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