बिहार समेत चार राज्यों में JMM लड़ेगी विधानसभा का चुनाव, बनेगी राष्ट्रीय पार्टी, महाधिवेशन में लिये गए बड़े फैसले

बिहार समेत चार राज्यों में JMM लड़ेगी विधानसभा का चुनाव, बनेगी राष्ट्रीय पार्टी, महाधिवेशन में लिये गए बड़े फैसले

रांचीः जेएमएम के 13वें राष्ट्रीय महाधिवेशन में बड़े फैसले लिये गये। इसमें 16 राजनीतिक प्रस्ताव पास किया गया। केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन समेत पार्टी के बड़े पदाधिकारी और नेता शामिल हुए।

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जेएमएम राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन जेएमएम को राष्ट्रीय पार्टी बनाने और झारखंड के बाहर इसे विस्तार देने का फैसला हुआ। बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में विधानसभा चुनाव लड़ने का राजनीतिक प्रस्ताव पास हुआ। बिहार के छह, असम के तीन, पश्चिम बंगाल के सात और ओडिशा के तीन जिलों में राजनीतिक पार्टी के तौर पर मजबूत करने और विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला हुआ। यही नहीं गुजरात, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में पूर्वी राज्यों की तरह राजनीतिक पहचान बनाने का भी संकल्प लिया गया।

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देखिये जेएमएमए के राष्ट्रीय महाधिवेश में कौन-कौन राजनीतिक प्रस्ताव पास हुए

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हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को बताया षड्यंत्र
महाधिवेशन में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष श्री हेमंत सोरेन को एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र के तहत झूठे आरोपों में फंसाकर गिरफ्तार किया गया। पार्टी ने इसे लोकतंत्र और आदिवासी अस्मिता पर हमला करार देते हुए संविधान की रक्षा का संकल्प दोहराया।

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स्थानीयता और खतियान आधारित नीति की मांग
पार्टी ने जोर देते हुए कहा कि 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति को अविलंब लागू किया जाए और सभी सरकारी नियुक्तियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। “भूमि वापसी आयोग” के गठन की मांग करते हुए आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

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अन्य राज्यों में भी बढ़ेगी संगठन की सक्रियता
महाधिवेशन में पारित प्रस्तावों के अनुसार झामुमो अब बिहार, असम, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में भी संगठन को विस्तार देगा। इन राज्यों के आदिवासी और प्रवासी समुदायों को संगठित कर राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति बनाई गई है।

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आरक्षण को मिले संवैधानिक संरक्षण
झामुमो ने झारखंड में अनुसूचित जनजाति (28%), अनुसूचित जाति (14%) और अन्य पिछड़ा वर्ग (27%) के आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर उसे पूर्ण संवैधानिक संरक्षण दिलाने की मांग की। पार्टी ने सामाजिक न्याय के लिए जातिगत जनगणना को लागू करने की भी जोरदार वकालत की।

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महिलाओं, प्रवासी श्रमिकों और युवाओं पर विशेष फोकस
प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को उठाते हुए विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग की मांग की गई। साथ ही आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं, नर्सों, पुलिस आरक्षियों आदि की नियुक्ति में 100% स्थानीय आरक्षण की वकालत की गई। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, स्थानीय भाषाओं का संरक्षण और सांस्कृतिक विकास के लिए ललित कला एवं संगीत अकादमी गठन का प्रस्ताव भी रखा गया।

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धर्मनिरपेक्षता, बंधुत्व और सामाजिक समानता पर जोर
महाधिवेशन में यह स्पष्ट किया गया कि झामुमो धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक समरसता और संविधान के मूल मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी ने सामाजिक बंटवारे और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया

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