CTET और TET मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: झारखंड हाईकोर्ट के 2023 के फैसले को किया खारिज

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January 30, 2025

शिक्षकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,TET परीक्षा बिना नौकरी या प्रमोशन नहीं

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के  2023 के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें झारखंड के निवासियों को, जिन्होंने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) या पड़ोसी राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास की थी, सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।

न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने इस फैसले को सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झारखंड के महाधिवक्ता की छूट के आधार पर दिया गया यह फैसला भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव करने के समान है, जो सही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि CTET धारकों और अन्य राज्य TET धारकों, जिन्होंने हाईकोर्ट के फैसले या नियमों में संशोधन के बाद आवेदन किया था, वे 2023 की भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र नहीं होंगे।

क्या है मामला ?

झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला कई याचिकाओं, जिनमें ‘झारखंडी CTET उत्तीर्ण अभ्यर्थी संघ’ और अन्य योग्य उम्मीदवारों द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) भी शामिल थी, के आधार पर आया था। इन याचिकाओं में राज्य सरकार को राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) आयोजित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, क्योंकि 2016 के बाद से यह परीक्षा आयोजित नहीं हुई थी।

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याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण लगभग 3-4 लाख उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित कर दिया गया, क्योंकि उनके पास वैध STET प्रमाणपत्र नहीं था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया था कि राज्य द्वारा परीक्षा न कराने या CTET को समकक्ष मान्यता न देने के कारण कई योग्य उम्मीदवार बाहर हो गए।

क्या था हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करने के दिशा-निर्देशों के क्लॉज 10 का हवाला दिया था, जिसमें किसी भी राज्य को अन्य राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के TET प्रमाणपत्र धारकों की पात्रता पर विचार करने की अनुमति दी गई है। हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि झारखंड राज्य ने वर्षों से STET आयोजित नहीं किया था और निर्देश दिया कि राज्य को परीक्षा हर साल आयोजित करनी चाहिए।

राज्य सरकार की आपत्तियां

राज्य सरकार ने एक शपथपत्र के माध्यम से क्षेत्रीय भाषा की आवश्यकताओं को लेकर चिंता व्यक्त की थी। सरकार ने तर्क दिया कि भर्ती प्रक्रिया में यह शर्त होनी चाहिए कि शिक्षक स्थानीय और आदिवासी भाषाओं में पढ़ाने के लिए योग्य हों।

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महाधिवक्ता ने कोर्ट को सूचित किया कि राज्य CTET धारकों के लिए पात्रता मानदंड में छूट देने को तैयार है, बशर्ते वे नियुक्ति के तीन साल के भीतर STET पास करें और झारखंड के निवासी हों।

हाईकोर्ट ने दिया था ये निर्देश

  1. राज्य को हर साल शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करनी होगी। यह परीक्षा सालाना या कम से कम तीन साल में एक बार आयोजित की जानी चाहिए।
  2. झारखंड के निवासी, जिनके पास CTET या किसी पड़ोसी राज्य का TET प्रमाणपत्र है, वे भर्ती प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
  3. इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त उम्मीदवारों को नियुक्ति के तीन साल के भीतर अपनी पहली उपलब्ध कोशिश में STET पास करना होगा।
  4. अभ्यर्थियों को तैयारी का समय देने के लिए सरकार तीन महीने तक परीक्षा आयोजित नहीं करेगी।
  5. यदि राज्य सरकार तीन साल के भीतर परीक्षा आयोजित करने में विफल रहती है, तो चयन प्रक्रिया पास कर चुके उम्मीदवारों को सेवा से नहीं हटाया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव करना अनुचित है। इस फैसले के बाद, अब झारखंड की सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मौका मिलेगा जिनके पास वैध STET प्रमाणपत्र होगा।

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