पेरिस ओलंपिक में मिला था कांस्य पदक, उतर रहा है रंग…इस खिलाड़ी ने मेडल बदलने की मांग की

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January 17, 2025

पेरिस ओलंपिक में मिला था कांस्य पदक, उतर रहा है रंग...इस खिलाड़ी ने मेडल बदलने की मांग की

नयी दिल्लीः 17 जनवरी (भाषा) पेरिस ओलंपिक में मिले कांस्य पदक की चमक फीकी पड़ने से निराश मनु भाकर और  निशानेबाज स्वप्निल कुसाले ने शुक्रवार को इस पदक को बदलने का अनुरोध किया ।

भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर ने कहा कि एक खिलाड़ी के लिए ओलंपिक पदक से बड़ा कोई स्मृति चिन्ह नहीं है इसलिये इसकी गुणवत्ता उच्च कोटि की होनी चाहिए। पेरिस ओलंपिक के पदकों की चमक इन्हें दिए जाने के कुछ ही महीनों बाद फीकी पड़ गई है। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और सरबजोत सिंह के साथ 10 मीटर मिश्रित टीम स्पर्धा में भाकर द्वारा जीते गए दो कांस्य पदकों की चमकीली ऊपरी परत उखड़ गई जिससे उनका अंदर का हिस्सा दिख रहा है।

मनु भाकर को पेरिस में मिला मेडल का रंग उतरा

उन्होंने और दुनिया भर के कई खिलाड़ियों ने पदक की चमक फीकी होने के मुद्दे को उठाया और उन्हें बदलने की मांग की। राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से नवाजे जाने के बाद 22 वर्षीय इस शीर्ष निशानेबाज ने पुष्टि की कि उनके पदकों की चमक फीकी पड़ गई थी।

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खेल रत्न प्राप्त करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान भाकर ने कहा, ‘‘पदक मिलने के तुरंत बाद दो तीन दिन के अंदर ही चमक फीकी होनी शुरू हो गई। मैं यह अपने पदक को देखने के बाद कह सकती हूं। ओलंपिक पदक जीवन भर संजोकर रखने वाली चीज है क्योंकि उस पदक के साथ बहुत बड़ी याद जुड़ी होती है। ’’

पेरिस ओलंपिक में मिले मेडलों की शिकायत

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि किसी एथलीट के करियर में इससे बड़ी कोई यादगार चीज नहीं हो सकती। इसकी गुणवत्ता शीर्ष स्तर की होनी चाहिए और अगर आईओसी (अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति) इसे बदल रही है तो यह बहुत अच्छा फैसला है क्योंकि भारत और अन्य देशों के बहुत से खिलाड़ियों ने शिकायत की है। ’’

ख़राब हो चुके मेडल का बदलेगा फ्रांस

आईओसी ने कहा कि फीके हुए पदकों को ‘मोनैई डे पेरिस (फ्रांस का राष्ट्रीय टकसाल)’ द्वारा व्यवस्थित रूप से बदला जाएगा। खिलाड़ियों को मिलने वाला नया पदक पुराने के समान ही होगा। भाकर ने पेरिस में अपनी सफलता के बाद प्रतियोगिताओं से ब्रेक ले लिया था, उन्होंने साल के अंत में होने वाले विश्व कप फाइनल और राष्ट्रीय चैंपियनशिप को छोड़ दिया था, लेकिन 2028 लॉस एंजिल्स खेलों को ध्यान में रखते हुए वह पिछले कुछ महीनों से ट्रेनिंग कर रही हैं।

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निशानेबाज़ स्वप्निल का मेडल का रंग भी उतरा

महाराष्ट्र के 29 साल के स्वप्निल ने को पेरिस ओलंपिक में 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में (451.4 स्कोर) कांस्य पदक मिला और इस वर्ग में पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय निशानेबाज है। स्वप्निल ने यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अर्जुन पुरस्कार लेने के बाद इस सम्मान पर खुशी जताई लेकिन कहा कि पेरिस में उन्हें जो पदक मिला था, उसकी चमक अब फीकी पड़ने लगी है ।

मेडल का रंग उतरने से निराश

उन्होंने   कहा, ‘‘मेरे पदक की चमक उतर रही है। पेरिस से भारत आने के कुछ दिन बाद ही पदक का रंग उतरने लगा था, अब तो उस पदक का पूरा रंग उतर गया है। मैं इस बदलवाने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ(आईओए) से बात करूंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ ओलंपिक पदक किसी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी सफलता में से एक है और इतनी जल्दी इसका रंग उतर जाना निराशाजनक है।’’

राइफ़ल स्पर्धा में स्वप्निल को मिली थी जीत

स्वप्निल ओलंपिक राइफल स्पर्धा में देश के लिए पदक जीतने वाले तीसरे खिलाड़ी है। उनसे पहले बीजिंग 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण और लंदन 2012 में इसी स्पर्धा में गगन नारंग के कांस्य पदक हासिल किया था। स्वप्निल ने अर्जुन पुरस्कार हासिल करने के बाद कहा कि वह 2028 में होने वाले ओलंपिक में अपने पदक के रंग को बदलने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा, ‘‘मैं पेरिस (ओलंपिक) के बाद अपने खेल पर और ज्यादा काम कर रहा हूं और निश्चित रूप से मैं अपने पदक का रंग बदलना चाहता हूं। यह देश का पदक है, इसलिए मैं दृढ़ संकल्पित हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस पदक के बाद भी मेरे व्यक्तित्व में कोई बदलाव नहीं आया है। पेरिस ओलंपिक के बाद मेरे जीवन के बारे में कुछ लोगों का सोचने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन मैं बिलकुल भी नहीं बदला हूं। मेरा काम केवल देश के लिए पदक जीतना है।’’

स्वप्निल ने कहा, ‘‘हम बचपन से अर्जुन पुरस्कार के बारे में सुनते आ रहे हैं और आज मुझे खुद इसे हासिल करने का मौका मिला। यह मेरे लिए दोहरी खुशी की बात है क्योंकि इसी समारोह में मेरी कोच (दीपाली देशपांडे) को भी सम्मानित (द्रोणाचार्य पुरस्कार) किया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनके (दीपाली देशपांडे) साथ लंबे समय से हूं। हम एक परिवार की तरह हैं। एक ही वर्ष में एक साथ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करना हमारे लिए एक बड़ा क्षण है।’’ चौदह साल की उम्र में निशानेबाजी शुरू करने वाले स्वप्निल एक किसान परिवार से आते हैं ।

 

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