स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण से PMCH में हड़कंप, गायब मिले प्रिंसिपल, बोले-कॉल किया, कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला

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June 23, 2026

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण से PMCH में हड़कंप, गायब मिले प्रिंसिपल, बोले-कॉल किया, कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला

पटनाः मंगलवार को पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण से हड़कंप मच गया। रेडियोलॉजी विभाग के उद्घाटन के बाद मंत्री निर्धारित बैठक के लिए पहुंचे, लेकिन वहां कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं मिला।डॉक्टर और नर्स मरीजों के स्ट्रेचर को हटाते हुए यह कहते नजर आए कि मंत्री जी आ रहे हैं, जल्दी हटाओ। घटना की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं।
PMCH के प्रिंसिपल पर भड़के स्वास्थ्य मंत्री
मंत्री निशांत कुमार के पहुंचते ही अस्पताल की गैलरी वाला एरिया पूरी तरह से खाली करा दिया गया। इन एरिया में स्ट्रैचर पर कई मरीज लेटे हुए थे।इस दौरान उन्होंने कॉलेज प्रिंसिपल से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन नहीं उठने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। मीटिंग के लिए निशांत कुमार ने प्रिंसिपल को कॉल किया था, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।इस पर निशांत कुमार ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कई खामियां दिखी है। प्रिंसिपल गायब थे। कॉल करने के बाद भी कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।निशांत कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रिंसिपल फोन भी नहीं उठ रहे हैं और उन्होंने अपने स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को चार्ज भी नहीं दिया है।
निरीक्षण में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं
निरीक्षण के दौरान निशांत कुमार से मरीजों ने कहा, x ray का 1500 रुपया लिया गया है। PMCH में हर चीज के लिए दलाल पैसा ले रहे हैं।चेस्ट वार्ड पहुंचने पर मरीजों और उनके परिजनों ने उन्हें घेर लिया और अस्पताल की अव्यवस्थाओं की शिकायत की।लोगों ने दवा नहीं मिलने, इलाज में देरी और कर्मचारियों की तरफ से पैसे मांगने जैसे आरोप लगाए।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि निरीक्षण में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश भी दिए।निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि भी मौजूद रहे। इसके बाद अस्पताल के अधीक्षक प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारियों के साथ अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 38 जिलों के सिविल सर्जन को मैंने कहा है कि कोई भी केस आता है तो पहले जिले में डायग्नोस करिए, उसके बाद ही पटना में रेफर कीजिए। अगर PMCH, IGIMS, NMCH या किसी से भी रेफर किया जाता है, तो पहले आप बेड उपलब्ध है या नहीं उसको सुनिश्चित कीजिए। इसके लिए हमलोग सॉफ्टवेयर भी बनवा रहे हैं। रेफर करने से पहले वो सॉफ्टवेयर पर देख लेंगे, उसके बाद ही आगे की प्रोसेस होगी।

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