छत्तीसगढ़ में झारखंड के ठग सक्रिय, 230 शिक्षकों के 52 करोड़ रुपए ठगे

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August 29, 2026

छत्तीसगढ़ में झारखंड के ठग सक्रिय, 230 शिक्षकों के 52 करोड़ रुपए ठगे

डेस्कः झारखंड के गिरोह ने छत्तीसगढ़ के कोंडागांव, सरगुजा और बलारामपुर में 230 से ज्यादा सरकारी शिक्षकों को कर्ज के जाल में फंसाकर 52 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की। स्कीम थी- लोन की 30 से 40 प्रतिशत रकम आप रखिए, बाकी हमें दीजिए, सारी किस्तें हम भरेंगे। जालसाजों ने होम लोन का झांसा देकर शिक्षकों के नाम पर्सनल लोन निकलवाए। सिबिल स्कोर अपडेट होने से पहले एक ही दिन में 3 से 4 बैंकों से कर्ज मंजूरी कराया गया। रकम आते ही गिरोह ने 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा अपने खातों में ट्रांसफर करा लिया। कुछ महीने किस्तें भरकर भरोसा जीता, फिर भुगतान रोक दिया। अब पूरी ईएमआई शिक्षकों के वेतन से कट रही है। प्रति शिक्षक औसतन 35 लाख रुपए का लोन लिया गया। कई लोन बिना बैंक गए और पात्रता से कई गुना अधिक मंजूर हुए। इससे बैंक की लोन शाखाओं और डीएसए की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

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नेटवर्क अंबिकापुर के दिलीप सोनी, इंजीनियर शिवशंकर दास और सारंगढ़ के डीएसए श्यामसुंदर जांगड़े ने रांची के सिराज अहमद की कंपनी सी-बुल्स ग्लोबल सॉल्यूशन के साथ खड़ा किया। शिवशंकर ने पहले अपने पिता के नाम 60 लाख रुपए का लोन लेकर किस्तें खुद भरने का मॉडल दिखाया। बाद में इसे डॉल्फिन कंपनी के जरिए सरगुजा और बलरामपुर में फैलाया गया।
पीड़ित शिक्षकों को कमीशन देकर एजेंट बनाया
गिरोह ने शुरुआती पीड़ितों को कमीशन देकर एजेंट बना लिया। दो-तीन किस्तें जमा होने पर उन्होंने अपने साथियों को भी स्कीम में जोड़ दिया। इसी कारण कई शिक्षक शिकायत करने से झिझक रहे हैं। 230 से ज्यादा पीड़ितों में अब तक केवल 15 ने शिकायत की है।
कोंडागांव में चार और सरगुजा में एक FIR दर्ज हुई है। सरगुजा में दीपक टोप्पो और कोंडागांव में अजय नाग व सुनीत बर्वा ने शिक्षकों से फॉर्म-16, पैन, आधार और सैलरी स्लिप ली। फिर एक ही दिन में कई बैंकों से लोन पास करा लिए। सवाल है कि एक आय, पुराने कर्ज और एक साथ चल रहे आवेदनों के बावजूद बैंकों ने इतने लोन कैसे मंजूर किए?
डीएसए की गड़बड़ी मानी, बैंककर्मियों का इनकार
आईसीआईसीआई बैंक की अंबिकापुर शाखा के मैनेजर गुडाकेश मिश्रा ने डीएसए के जरिए गड़बड़ी की बात मानी, लेकिन बैंककर्मियों की संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने बैंक का एनपीए बढ़ने की बात भी स्वीकार की। आईसीआईसीआई बैंक से जुड़े रहे हेमंत पटेल ने अजय नाग के कहने पर शिक्षक संजय कोडोपी का 15 लाख रुपए का लोन प्रोसेस किया था। उसने कहा कि सत्यापन की जिम्मेदारी दूसरे कर्मचारियों की थी। एचडीएफसी की डीएसए के लिए काम कर चुके अमन सोनी ने संजय को 7.78 लाख रुपए का लोन दिलाया। उसने कहा कि वह जांच एजेंसी को जानकारी दे चुका है।

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