चतरा में 17.29 करोड़ की माइनिंग रॉयल्टी गड़बड़ी पर बवाल, DMO पर भ्रष्टाचार और घूसखोरी के गंभीर आरोप

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June 2, 2026

चतरा में 17.29 करोड़ की माइनिंग रॉयल्टी गड़बड़ी पर बवाल, DMO पर भ्रष्टाचार और घूसखोरी के गंभीर आरोप

चतरा: जिले के हंटरगंज प्रखंड निवासी एवं चर्चित पत्थर कारोबारी श्रीनिवास ने जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) मनोज टोप्पो पर भ्रष्टाचार, घूसखोरी, ब्लैकमेलिंग और सरकारी राजस्व में भारी गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाकर प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। समाहरणालय के समीप आयोजित एक प्रेस वार्ता में श्रीनिवास ने दावा किया कि उनके पास व्हाट्सएप चैट, विभागीय दस्तावेज और अन्य कई साक्ष्य मौजूद हैं।
श्रीनिवास ने आरोप लगाया कि शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन परियोजना में कार्यरत एजेंसियों के माध्यम से करीब 28 महीनों तक फर्जी माइनिंग रॉयल्टी चालान जारी किए गए, जिससे सरकार को लगभग 17 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में जिला खनन कार्यालय की भूमिका संदिग्ध है और निष्पक्ष जांच होने पर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मामले की शिकायत उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) सहित विभिन्न जांच एजेंसियों को भी भेजी गई है। उन्होंने डीएमओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।प्रेस वार्ता के दौरान श्रीनिवास ने दावा किया कि यदि पूरे मामले की गहन जांच हुई तो कथित घोटाले की राशि 17 करोड़ रुपये से बढ़कर 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि मामले को दबाने के लिए किसी निचले स्तर के कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिले में अवैध खनन, बालू, पत्थर और कोयला कारोबार पर रोक नहीं लगी तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।
उन्होंने खनन विभाग पर नियमों की अनदेखी कर माइंस और क्रशरों के संचालन की अनुमति देने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि बिना आवश्यक स्वीकृतियों और दस्तावेजों के संचालित हो रहे कई क्रशर एवं माइंस विभाग की नजर में होने के बावजूद कार्रवाई से बचे हुए हैं।वहीं, जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि मामला 17.29 करोड़ रुपये नहीं बल्कि करीब 26 करोड़ रुपये की रॉयल्टी गड़बड़ी से जुड़ा है, जिसका खुलासा स्वयं खनन विभाग ने किया है। डीएमओ के अनुसार जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।उन्होंने बताया कि जांच में परियोजना से जुड़ी एजेंसी इरकॉन और उसकी सहयोगी कंपनी राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा सरकारी दस्तावेजों एवं डिजिटल रिकॉर्ड के कथित दुरुपयोग के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और अन्य कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला चतरा ही नहीं, पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।

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