बिहार चुनाव का एलान आज 4 बजे होगा, कल ही मुख्य चुनाव आयुक्त का दौरा हुआ खत्म, नीतीश कुमार करेंगे पटना मेट्रो का उद्घाटन

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पटना: बिहार चुनाव के तारीखों की घोषणा आज 4 बजे की जाएगी । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दौरा कल ही खत्म हुआ है। चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना मेट्रो का उद्धाटन करेंगे । माना जा रहा है की इस बार कम से कम चरणों में मतदान रखा जाएगा । बिहार विधानसभा में 243 सीटे हैं।

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बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजे बेहद रोमांचक रहे थे । राज्य की 243 सीटों पर हुए मतदान में बहुमत के लिए 122 सीटों की ज़रूरत थी। 57.29% मतदान के बाद नतीजे आए, जिनमें महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद रही, लेकिन सरकार एनडीए ने बनाई।

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2020 का नतीजा

  • राजद : 75 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूर)

  • भाजपा : 74 सीटें (एनडीए की रीढ़ बनी)

  • जेडीयू : 43 सीटें (भारी गिरावट, 28 सीटें कम)

  • कांग्रेस : 19 सीटें (8 सीटें कम)

  • सीपीआई (एमएल)एल : 12 सीटें (9 सीटें बढ़ीं)

  • एआईएमआईएम : 5 सीटें (पहली बार बड़ी उपस्थिति)

सत्ता का गणित

2020 में तेजस्वी यादव की राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। लेकिन भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और जेडीयू के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा छू लिया। सीटों के भारी नुकसान के बावजूद, नीतीश कुमार को एनडीए ने मुख्यमंत्री बनाया और वे एक बार फिर सत्ता में लौटे।

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2025 में क्या बदला?

  1. तेजस्वी यादव की चुनौती – 2020 के बाद तेजस्वी लगातार विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय रहे। रोजगार, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर उन्होंने जनता के बीच अपनी पकड़ मज़बूत की। अब 2025 में वे खुद को सीएम पद के सबसे बड़े दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं।

  2. भाजपा का आत्मविश्वास – भाजपा को 2020 में 74 सीटें मिली थीं और उसने दिखा दिया था कि वह बिहार की राजनीति में नंबर-1 पार्टी बनने की क्षमता रखती है। 2025 में पार्टी उसी रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें विकास, केंद्र की योजनाएँ और हिंदुत्व की राजनीति प्रमुख मुद्दे हैं।

  3. जेडीयू की मुश्किलें – 2020 के नतीजे ने जेडीयू की ताक़त घटा दी थी। नीतीश कुमार की लोकप्रियता पर उम्र और लंबे शासन का असर पड़ा है। 2025 में पार्टी का भविष्य भाजपा पर निर्भर दिख रहा है।

  4. कांग्रेस और वाम दल – कांग्रेस 2020 में 19 सीटों तक सिमट गई थी। 2025 में भी उसके लिए चुनौती वही है – संगठन और चेहरा। वहीं, वाम दल खासकर सीपीआई (एमएल)एल ने पिछली बार 12 सीटें जीतकर उम्मीद जगाई थी और इस बार भी वे महागठबंधन के लिए अहम हैं।

  5. एआईएमआईएम का रोल – औवैसी ने सीमांचल में 5 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। 2025 में भी वे मुस्लिम वोटों पर असर डाल सकते हैं और ये महागठबंधन व एनडीए दोनों के लिए चुनौती है।

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