RANCHI: रांची पुलिस ने नामकुम थाने में दर्ज मामले (कांड संख्या 227 / 2022) से संबंधित केस डायरी में झारखंड डिप्लोमा स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (कनीय विद्युत अभियंता) 2021 के पेपर लीक मामले का ब्योरा विशेष अदालत में पेश किया है। केस डायरी के अनुसार, परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी मेसर्स बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड का पूर्व निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा को इस मामले का मुख्य सूत्रधार बताया। पुलिस ने अरुण कुमार को सात अगस्त 2026 को मुंबई से गिरफ्तार किया था। इसके बाद जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में भी सीआईडी उससे पूछताछ कर चुकी है।
आईआईटी कानपुर से इंजीनियर की पढ़ाई पूरी कर चुका अरुण प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर डेटा लीक करने वाले गिरोह में शामिल था। जेएसएससी ने बिंसिस टेक्नोलॉजी को प्रश्नपत्रों की छपाई, बायोमैट्रिक, ओआरएम शीट स्कैनिंग, डेटा प्रोसिसिंग और परिणाम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि अरुण कुमार ने 26 अगस्त 2019 को निदेशक पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन यह केवल दिखावा था। वह लगातार एजेंसी का संचालन कर रहा था। जेएसएससी के तत्कालीन सचिव अशोक कुमार खेतान और परीक्षा नियंत्रक सह उप सचिव मधुमिता कुमारी के बयानों से भी इसकी पुष्टि हुई है। उनके अनुसार, कनीय विद्युत अभियंता नियुक्ति परीक्षा से जुड़ी हर गोपनीय बैठक में अरुण कुमार वर्तमान निदेशक अजीत कुमार के साथ उपस्थित रहता था।
परीक्षा से पहले ही अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाये गये थे
अरुण कुमार ने व्यवस्था का फायदा उठाकर तीन जुलाई 2022 को आयोजित परीक्षा शुरु होने से पहले ही सीलबंद प्रश्नपत्र व्हाट्एप के माध्यम से लीक कर दिये थे। मामले में गिरफ्तार आरोपी अभिषेक कुमार और अभ्यर्थी पंकज कुमार मंडल से पूछताछ में खुलासा हुआ कि अरुण कुमार और उसके सिंडिकेट ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 15-15 लाख रुपये या उससे अधिक लेकर हल किए हुए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराये थे। साथ ही, परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाये गये थे।







