रांचीः झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को फिर से पांच जुलाई को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा है कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के मौजूदा मानकों की समीक्षा हो। उन्होंने पत्र में राज्य में बढ़ते अपराध का जिक्र किया है।
वित्त मंत्री ने कहा है कि झारखंड में पहले की तुलना में वर्ष 2026 में अपराध की प्रकृति में काफी बदली है। दूसरे देश में बैठे अपराधी कारोबारियों और जनप्रतिनिधियों से रंगदारी मांग रहे हैं, जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। अपराधियों के हौसले पहले की तुलना में काफी बढ़ गये हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले जमशेदपुर में पुलिस की मौजूदगी में पीसीआर वैन से खींचकर एक निर्दोष युवक की हत्या कर दी गयी। यह अपराधियों के दुस्साहस को दिखाता है।
उन्होंने डीजीपी से मंत्रियों, सांसदों और विधायकों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को खतरे के अनुसार सुरक्षा, वाहन और अन्य सुविधाएं देने के कहा। पत्र की प्रति गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को भी भेजी गयी है। मंत्री ने पत्र में लिखा है कि उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को भेजे गये पत्र में सुरक्षा कर्मियों के लिए एक अतिरिक्त वाहन देने का अनुरोध किया था, लेकिन दो माह के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। यदि अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता था, तो स्पष्ट रूप से हां या ना में जवाब मिलना चाहिए था। शायद आपने समझा होगा कि राज्य के डीजीपी की राज्य के मंत्री के प्रति कोई उत्तरदायित्व नहीं है।
अफसर अधिक सुविधाओं का उपयोग तो नहीं कर रहे!
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने यह भी कहा कि क्या पुलिस विभाग यह सुनिश्चित कर सकता है कि झारखंड के अफसरों को दी गयी सुरक्षा और अन्य सुविधाएं गृह विभाग के मानक के अनुरूप हैं या फिर व्यवहार में उनके द्वारा अधिक सुविधाओं का उपयोग किया जा सकता है।


