धनबाद/ बाघमारा: कोयलांचल में कोयला माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताजा उदाहरण बरोरा क्षेत्र के महेशपुर साइलो प्लांट में देखने को मिला है। करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक साइलो प्लांट के नीचे ही अवैध खनन की सुरंगें खोदे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बीसीसीएल और सीआईएसएफ की संयुक्त छापेमारी में ऐसे संकेत मिले हैं, जिन्होंने न सिर्फ कंपनी प्रबंधन बल्कि रेलवे अधिकारियों की भी चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, कोयला तस्करों ने अवैध खनन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए इलाके की जोरिया (नाला) का रुख तक बदल दिया। इसके बाद रेट-होल के कई मुहाने खोलकर भूमिगत सुरंगों के जरिए कोयला निकालने का खेल शुरू कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा नेटवर्क देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना के बेहद करीब संचालित किया जा रहा था।

रेलवे ट्रैक पर खतरे की घंटी
मामले का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि अवैध खनन वाला क्षेत्र धनबाद–चंद्रपुरा रेलवे लाइन के नजदीक है। इसी रेलखंड से हर दिन दर्जनों मालगाड़ियां और कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ सुरंगें रेलवे लाइन के आसपास तक पहुंच चुकी हैं। यदि भूमिगत खनन का यह सिलसिला जारी रहा तो जमीन धंसने और ट्रैक प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।



