नई दिल्ली: नीट (NEET-UG) पेपर लीक विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों का खामियाजा छात्रों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ा है, जो अत्यंत पीड़ादायक स्थिति है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ नीट-यूजी विवाद से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि देश के युवाओं को परीक्षा व्यवस्था की विफलताओं के कारण निराश नहीं होने दिया जा सकता।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए।” अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को छात्रों और उनके परिवारों के लिए “बेहद दर्दनाक” बताया।
NTA के पुनर्गठन की मांग पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में से एक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पुनर्गठन या उसके स्थान पर अधिक स्वायत्त और मजबूत संस्था के गठन की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण एग्जाम के संचालन के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिस पर छात्रों और अभिभावकों का पूरा भरोसा हो।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल
नीट पेपर लीक मामले के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाने पर जोर दे रहा है।
छात्रों और अभिभावकों की उम्मीदें बढ़ीं
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।


