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चांडिल-टाटा रेल सेक्शन में पैसेंजर ट्रेनों की लेटलतीफी पर हेमंत सोरेन ने जताई नाराजगी, रेल मंत्री को कहा-‘झारखंड के लोगों की गरिमा से समझौता नहीं’

रांचीः चांडिल-टाटा रेल सेक्शन में पैसेंजर ट्रेनों की लेटलतीफी और मालगाड़ियों को तरजीह दिये जाने का मामला अब गर्म हो चुका है। मुख्यमंत्री ने इस मामले को लेकर अपनी बातें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पैसेंजर ट्रेनों को रोके जाने पर नाराजगी जाहिर की है। इससे पहले जेडीयू विधायक सरयू राय भी इस मुद्दे को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर चुके है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से रविवार को एक पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली गई। जिसमें एक एक्स हैंडल टाटा नगर की रेल द्वारा साझा कि गई ट्रेनों के लेटलतीफी की लिस्ट पर अपनी बातें रखते हुए जेएमएम की ओर से लिखा गया कि पिछले 2 वर्षों से लगातार चांडिल–टाटा सेक्शन पर यात्रियों को झुलाया जा रहा है।हर रोज़ दर्जनों यात्री ट्रेनें घंटों लेट — और उसी ट्रैक पर मालगाड़ियाँ बिना रुके निकल जाती हैं।आज हालत ये है कि जो सफर पहले 3-6 घंटे में होता था, वह 8-12 घंटे तक खिंच रहा है। धिक्कार है।

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इसके बाद जेएमएम के इस पोस्ट को फौरन संज्ञान में लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे को उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग करते हुए इसे सुधारने की मांग की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि चांडिल– टाटा रेल सेक्शन की स्थिति अब अस्वीकार्य हो चुकी है।पिछले 2 वर्षों से यात्री ट्रेनें लगातार घंटों लेट चल रही हैं, जबकि उसी ट्रैक पर मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही जारी है। इसका सीधा असर सभी रेल यात्रियों और खास कर के झारखंड के हजारों दैनिक यात्रियों, श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है।
यह केवल परिचालन का मुद्दा नहीं, बल्कि प्राथमिकता तय करने का प्रश्न है।
क्या रेलवे के हिसाब से झारखंड के लोगों का समय भी उतना ही मूल्यवान है जितना देश की अर्थव्यवस्था के लिए माल परिवहन।
मैं रेल मंत्री श्री .@AshwiniVaishnaw जी से आग्रह करता हूँ कि:
– चांडिल–टाटा सेक्शन में यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाए
– लंबित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए
– ट्रेन लेट होने की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए
देश के सभी रेल यात्री एवं झारखंड के नागरिकों की सुविधा एवं गरिमा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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